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आसान नहीं था इंटरनेशनल मेडल जीतना: काजल सैनी

आसान नहीं था इंटरनेशनल मेडल जीतना: काजल सैनी -परिवार में नहीं थी किसी को शूटिंग की जानकारी, काजल ने एक महीने में चार इंटरनेशनल मेडल जीत किया है हरियाणा का नाम रोशन

नारनौल,14 जनवरी,2020 :   दोहा (कतर) में हुई एशियन शूटिंग चैंपियनशिप तथा नेपाल में हुई 13वें साउथ एशियन गेम्स में चार मेडल दो गोल्ड व दो ब्रॉन्ज जीतने वाली राइफल शूटर काजल सैनी ने कहा कि इंटरनेशनल मेडल जीतना उनके लिए आसान कार्य नहीं था क्योंकि उनके अलावा परिवार के किसी अन्य सदस्य ने न तो कभी शूटिंग गेम खेला है और न ही उन्हें इसके बारे में ही कोई ज्यादा जानकारी थी मगर परिजनों ने हर कदम पर उनका साथ दिया और इसी का नतीजा है कि वह एक माह में चार इंटरनेशनल मेडल जीतने में कामयाब रही।

रोहतक की रहने वाली काजल मंगलवार को सैनी सभा द्वारा आयोजित मकर संक्रांति कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात कर रही थी। काजल की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ट्वीट कर काजल को उनकी इस उपलब्धि पर बधाई व शुभकामनांए दी थी।

आसान नहीं था इंटरनेशनल मेडल जीतना: काजल सैनी

काजल ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य टोक्यो ओलम्पिक के लिए जल्द होने वाले ट्रायल में अच्छा प्रदर्शन कर भारतीय टीम में अपनी जगह सुनिश्चित करना है। यहां बता दें कि भारत को 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में ओलम्पिक कोटा हासिल है। उन्होंने कहा कि शूटिंग गेम काफी खर्चीला होने के बावजूद उनके माता-पिता ने उन्हें टेनिंग के दौरान कभी भी पैसों की दिक्कत नहीं आने दी।

काजल सैनी एजूकेशन सोसायटी रोहतक के पूर्व प्रधान तथा सामाजिक संस्था रेडी.टू.हेल्प के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार सैनी की सुपुत्री है। विजय ने बताया कि उन्हें काजल के पदक जीतने की पूरी उम्मीद थी, क्योंकि वह इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही थी। नारनौल पहुंचने पर मार्किट कमेटी के चैयरमैन जेपी सैनी, अभय सिंह सैनी, रामचंद्र सैनी व विभिन्न सामाजिक संगठन के प्रतिनिधियों ने काजल सैनी का नोटों व फूलों की मालाओं से भव्य स्वागत किया।

रेंज नहीं होने की वजह से दिल्ली होना पड़ा शिफ्ट:काजल रोहतक के राजकीय महिला कालेज में एनसीसी कैडेट रही है और उन्होंने शूटिंग की शुरूआत एनसीसी से ही की थी मगर हरियाणा में 50 मीटर राइफल शूटिंग की प्रेक्टिस के लिए कोई रेंज नहीं होने की वजह से उन्हें चार साल पूर्व दिल्ली में अपने मामा के घर नजफगढ़ शिफ्ट होना पड़ा। जहां से वह हर रोज तुगलकाबाद स्थित डा. करणी सिंह शूटिंग रेंज के लिए बस से रवाना होती और वहां दिनभर प्रेक्टिस कर वापस लौटती थी।( Photo Courtesy:Amarujala.com and Twitter ):

बी.एल. वर्मा /सुरेन्द्र व्यास द्वारा

 

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