Haryana

उच्च शिक्षा का भविष्य ई-लर्निंग में निहित: प्रो. बक्शी

हकेंवि में आयोजित व्यावासायिक विकास एवं क्षमता निर्माण पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का चौथा दिन
-तकनीक से शिक्षा व शिक्षकों की भूमिका पर विस्तार से हुई चर्चा
बी.एल. वर्मा द्वारा :
महेन्द्रगढ 14 मार्च 2019 :उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यापनरत शिक्षकों को व्यावसायिक विकास व क्षमता निर्माण के मोर्चे पर प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ में आयोजित कार्यशाला के चौथे दिन बृहस्पतिवार को उच्च शिक्षा में ई-लर्निंग व तकनीक के महत्व पर चर्चा हुई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ के निर्देशन व हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल, चण्डीगढ़ के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में गुरूवार को गुरू अंगद देव टीचिंग लर्निंग सेन्टर के अध्यक्ष व पीडीएम यूनिवर्सिटी, बहादुरगढ़ के कुलपति प्रो. ए.के. बक्शी विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। इसके साथ-साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के गुरू तेग बहादुर खालसा कालेज के प्राचार्य डा. जसविन्दर सिंह व गुरू अंगद देव टीचिंग लर्निंग सेन्टर की डॉ. विमल रार ने प्रतिभागियों को उच्च शिक्षा में ई-लर्निंग, तकनीक के विकास एवं मूक्स के महत्व से अवगत कराया।
प्रो. ए.के. बक्शी ने अपने व्याख्यान में बताया कि किस तरह तकनीक की मदद से किसी भी समय अध्ययन की व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि अन्य देशों के मुकाबले भारत में यह प्रक्रिया अभी धीमी है, लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस दिशा में जोर-शोर से प्रयासरत है। सरकार की ओर से शिक्षा के डिजिटलीकरण पर नौ हजार करोड़ रूपये खर्च करने की योजना है। उन्होंने कहा कि मूक्स पाठ्यक्रमों के विकास और उनकी स्वीकार्यता से स्पष्ट है कि विश्वविद्यालयों को अब इस तकनीकी पहलू को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को अध्यापन कार्य हेतु तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से हम शिक्षण प्रक्रिया को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बना सकते हैं। इसी कड़ी में डा. विमल रार ने उच्च शिक्षा में तकनीक के मोर्चे पर शिक्षकों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि शिक्षकों के लिए अध्यापन कार्य में तकनीक की अहम भूमिका हो गई है। डा. विमल ने तकनीक के प्रयोग से शिक्षण कार्य की गुणवत्ता में आने वाले सुधार से भी अवगत कराया।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में डॉ. जसविन्द्र सिंह ने प्रतिभागियों को ‘मूक्स‘ के महत्व से अवगत कराया और बताया कि शैक्षणिक स्तर पर मूक्स विद्यार्थियों के लिए किस तरह उपयोगी हैं। उन्होंने बताया कि इन पाठ्यक्रमों की मदद से विद्यार्थी अब अपनी सहूलियत के हिसाब से अध्ययन कर सकते हैं और यह प्रक्रिया आन लाइन लर्निंग के विकास में उपयोगी हैं। डा. सिंह ने बताया कि मूक्स केवल एक तरफा संवाद तक सीमित नहीं है। इसमें विभिन्न श्ंाकाओं का निदान भी विद्यार्थी विशेषज्ञों से प्राप्त कर रहे हैं और विश्वविद्यालयों में यह पाठ्यक्रमों का नियमित हिस्सा बन रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. संजीव कुमार ने विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से विशेषज्ञों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों को अवश्य ही विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी भविष्य में मूक्स के निर्माण में मददगार साबित होगी। इस अवसर पर प्रतिभागियों के साथ शिक्षा पीठ के अधिष्ठाता डा. प्रमोद कुमार व शिक्षा पीठ की प्रोफेसर नीरजा धनखड़ सहित भी उपस्थित रही।