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ऋतुओं का आनन्द   

ऋतुओं का आनन्द   

            ऋतुओं का आनन्द 

धृति ग्रोवर

गर्मी आई ,गर्मी आई ,साथ में पसीना ले आई ;

ऋतुओं का आनन्द     ऋतुओं का आनन्द   

ठंडा खाने को मन ललचाया ,पानी पी कर प्यास बुझाई ;
पंखा चलाया ,पसीना सुखाया ,तब जा कर कहीं शान्ति आई ;
बारिश आई ,बारिश आई ,मौसम में बहार आई ;
झूले में पेंग बढ़ाई ,ठंडी हवा मन को भाई ;
ऋतुओं का आनन्द     ऋतुओं का आनन्द   
दशहरा आया ,दशहरा आया ; राम-लीला ने त्रेता -युग  पढ़ाया ;
जिसमें रावण वध दिखलाया  ,बुरे कर्मों का फल सिखलाया  ;
व्यवहार ,ज्ञान से अधिक प्रभावी है ,यह ज्ञानी रावण के दुश्चरित्र द्वारा समझ आया ;
ऋतुओं का आनन्द     ऋतुओं का आनन्द   
दिवाली आई ,दिवाली आई ,रंग -बिरंगी लड़ियां लगाईं ;
गणेश -लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर ,पटाखे चलाए , मिठाईयां खाई ;
चारों ओर रोशनी देख ,सब के चेहरे पर खुशियां छाईं ;
ऋतुओं का आनन्द     ऋतुओं का आनन्द   
सर्दी आई ,सर्दी आई ,गर्म कपड़ों ने ठंड भगाई ;
रजाई में नींद मन को भाई ,अब वसंत ने ली अंगड़ाई ;
ऋतुओं का आनन्द     ऋतुओं का आनन्द   
देवी सरस्वती की आराधना कर ;वाणी ,संगीत और ज्ञान ने अपनी महिमा दिखाई ;
बागों में हरियाली छाई ,प्रकृति ने अपनी कला दिखलाई ;
रंगीन फूलों से मनमोहक खुशबू आई ;
बगीचों में घूमने का आनन्द आया ,सब के चेहरों पर मुस्कान छाई ;
ऋतुओं का आनन्द          ऋतुओं का आनन्द   
होली आई ,होली आई ,पिचकारी में रंगों से खेल बड़ी मस्ती आई ;
स्वादिष्ट पकवान खा ,बड़ा आनंद आया ;
मित्रों से गले मिल ,गिले -शिकवों को दूर भगाया ;
यह कविता सब ने सराही  ;
ऋतुओं का आनन्द   
गुरुओं ने मुझे दी बधाई।
धृति ग्रोवर ,कछा 10 
डी.पी .एस .स्कूल ;फरीदाबाद (हरियाणा  )