एन.जी.टी. ने अवैध खनन पर कसी नकेल

दर्जनों स्टोन के्रशरों पर गिर सकती है गाज
बी.एल. वर्मा द्वारा
नारनौल 6दिसंबर 2018
खनन विभाग, पर्यावरण विभाग तथा जिला के कुछ आला अधिकारियों की व्यापक लापरवाही के चलते जिला के नांगल चौधरी क्षेत्र में अवैध तरीकों से स्थापित स्टोन क्रशर, बालू व बजरी के खनन से यहां के अनेकों गांवों के लोगों की परेशानी को आखिर एन.जी.टी. ने सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। यहां के लगभग दो दर्जन गांवों के लोग अवैध खनन से वर्षों से परेशान थे। अवैध खनन का काम नदी क्षेत्रों में इस कदर ज्यादा था कि यहां से गुजरने वाली दोनों नदियों कृष्णावती तथा दोहान के अस्तित्व को खतरा बना दिया है। इस नदी में लाखों पेड़ खड़े थे। अवैध खनन से ये लाखों पेड़ अवैध खनन की भेंट चढ़ गए तथा नदी क्षेत्र को पेड़ हीन बना दिया। पेड़ों की अवैध कटाई तथा खनन के काम में खनन विभाग तथा पुलिस विभाग आदि ने मानों अपनी आंखें बंद कर ली हों। समस्या की गंभीरता को देखते हुए उक्त क्षेत्र के सामाजिक लोगों ने उक्त समस्याएं लगातार कभी जिला प्रशासन के सामने तथा कभी पर्यावरण विभाग के सामने उठाई है। लेकिन हर जगह लोगों को केवल मायूसी ही मिली। थक हारकर अंत में लोगों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इस पर भी अनेक ऐसे अवसर आए जब अवैध खनन करने वालों ने न्यायालय के आदेशों को भी अनसुना कर दिया। इसके बाद यहां की समस्याओं से परेशान लोगों ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के पास अपने व्यथा सुनाई। इसी प्राधिकरण की कार्रवाई ने अब नांगल चौधरी क्षेत्र की कृष्णावती नदी आदि क्षेत्रों में अवैध रूप से चला रहे स्टोन क्रेशरों, बजरी वाशिंग प्लांट तथा अवैध बजरी खनन का काम करने वालों पर नकेल कसने का काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के नए आदेश के बाद अब जिले के लगभग 50-60 स्टोन के्रशरों पर गाज गिरने की संभावना बन गई है। जिला के नांगल चौधरी क्षेत्र में लगभग 200 क्रेशर चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश ऐसे के्रशर हैं जो कि कोई न कोई मानक इसके आड़े आ रहा है। इसके बावजूद धोलेड़ा, बिगोपुर, इस्लामपुरा तथा बखरीजा आदि गांवों के पास मानक संख्या 6 को सरासर उल्लंघन हो रहा है। एन.जी.टी. ने स्पष्टï कर दिया है कि जांच में यह भी देखा जाएगा कि के्रशर जोन की गांव से हवाई दूरी एक किलोमीटर से ज्यादा होनी चाहिए। यदि इस शर्त पर सख्ती बरती जाती है तो निश्चित रूप से धोलेड़ा के्रशर जोन के लगभग सभी क्रेशर बंद किए जा सकते हैं। अब आने वाले एक महीने में जिला उपायुक्त उक्त के्रशरों के अलावा यहां के अन्य क्रेशरों की स्थिति की जांच करेगी तथा उक्त जांच की रिपोर्ट एन.जी.टी. को एक मास में सौंपी जाएगी। अब देखना यह है कि कौन-कौन से स्टोन क्रेशर अपने मानक पूरे करते हैं तथा कौन-कौन से क्रेशरों पर गाज गिर सकती है।
क्या-क्या हैं पैरामीटर:
हरियाणा सरकार द्वारा 11 मई 2016 को जारी किए गए गजट नोटिफिकेशन के अनुसार कुछ मुख्य मानक बिन्दु इस प्रकार से हैं-क्रम संख्या छह में बताया गया है कि निकटतम गांव व फिरनी से अपेक्षित दूरी एक किलोमीटर होनी चाहिए। गांव की फिरनी नहीं है तो दूरी गांव के लाल डोरे से मापी जाएगी।
क्रम संख्या 10 के अनुसार अंतरंग रोगियों के प्रबंध के लिए 25 या उससे अधिक बिस्तरों का प्रबंध करने वाली किसी अंतरंग स्वास्थ्य उपचार इकाई की अपेक्षित दूरी एक किलोमीटर होनी चाहिए। ज्ञातव्य है कि जिला के अधिकांश क्रेशर जोन उक्त दोनों शर्तों पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
इस संबंध में जिला खनन अधिकारी नीरज कुमार का कहना है कि उनका भरसक प्रयास रहता है कि नदी क्षेत्रों में बजरी या बालू मिट्टïी का खनन किसी भी कीमत पर ना हो। इस नदी के आसपास के गांवों के कुछ लोग अवैध खनन करते हैं। इसके लिए वे रात-दिन निगरानी करते हैं। अवैध खनन करने वालों पर शिकंजा कसते हुए वे अवैध खनन करने वालों के वाहन जप्त करते हुए उनके खिलाफ मामले दर्ज करने के लिए पुलिस को सौंपते हैं। वे अब भविष्य में इस तरह के खनन पर ज्यादा निगरानी करेंगे।