कंवर के दम पर जिला ऊना ने हिमाचल की सत्ता में पाया नया मुकाम

कंवर के दम पर जिला ऊना ने हिमाचल की सत्ता में पाया नया मुकाम

ऊना (2 जुलाई),2020:       वर्ष 1977 में जिला ऊना हिमाचल प्रदेश की सत्ता का केंद्र बनने से एक कदम दूर रह गया, जब मुख्यमंत्री की कुर्सी ठाकुर रणजीत सिंह के हाथ से मात्र एक वोट से निकल गई। वक्त का पहिया चलता गया तथा सरला शर्मा, रामनाथ शर्मा तथा रामदास मलांगड़ जैसे नेताओं ने भी सत्ता में क्षेत्र की नुमाईंदगी की। इनके साथ-साथ ठाकुर देसराज, विजय कुमार जोशी, प्रवीण शर्मा, कुलदीप कुमार तथा मुकेश अग्निहोत्री भी मंत्री पद पाने वाले जिला के नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हैं। लेकिन अब वर्तमान परिदृश्य में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर की कार्यकुशलता के चलते जिला ऊना सरकार में नया मुकाम हासिल कर रहा है।मधुरभाषी, ईमानदार, साफ-सुथरी छवि के चलते वीरेंद्र कंवर एक ऐसे समय में प्रदेश सरकार में और अधिक ताकतवर बनकर उभरे हैं, जब कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का व्यापक असर हर गांव, हर मोहल्ले तक दिख रहा है। विवादों से दूर रहकर अपने काम को बखूबी पूरा करने की क्षमता से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन्हें कृषि विभाग जैसा एक और महत्वपूर्ण महकमा देकर प्रदेश सरकार में उनका कद बढ़ाया है। जिला ऊना के लिए यह सम्मान का विषय है कि अब वीरेंद्र कंवर के पास गांव व किसान से जुड़े पांच बड़े विभाग हैं। वर्ष 1972 में ऊना के अस्तित्व में आने के बाद इतिहास में शायद ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि हिमाचल प्रदेश के किसान व गांव की सत्ता का केंद्र जिला ऊना बना हो।
कृषि विभाग का जिम्मा वीरेंद्र कंवर को सौंपा जाना इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रयासरत है। हिमाचल प्रदेश का दिल गांवों में बसता है, जहां एक बहुत बड़ा वर्ग कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से पलता है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने कंवर पर अपना भरपूर भरोसा जताया है।
लगातार चौथी बार विधायक बने वीरेंद्र कंवर के नेतृत्व में कोरोना संकट के दौरान ग्रामीण विकास, पंचायती राज तथा उन्हें प्रदान किए गए अन्य विभागों के माध्यम से लोगों को राहत प्रदान करने का सफल अभियान छेड़ा गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। संकट के बीच मनरेगा, 14वें वित्तायोग, एसडीपी तथा अन्य मदों को मिलाकर कन्वर्जेंस के फॉर्मूले पर ग्रामीण क्षेत्रों में तरक्की का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह शुरू हो गया। इससे कोरोना संकट के बीच बेरोजगारों की जेब में पैसे आने लगा तथा उनकी मुश्किलें दूर हुई। जब बाजार में मास्क की कमी होने लगी तो वीरेंद्र कंवर ने महिला स्वयं सहायता समूहों को इस काम के साथ जोड़ा तथा लोगों को सस्ते मास्क तथा सैनिटाइजर की उपलब्धता हो पाई।
गांवों की अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ-साथ पशु पालन तथा मत्स्य पालन भी अहम भूमिका निभाते हैं। जो परिवार खेती बाड़ी से जुड़े हैं, उनका नाता पशु पालन से भी रहता है। इसलिए किसानों को बकरी तथा सुअर पालन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रयासरत वीरेंद्र कंवर को अब कृषि विभाग मिलने के बाद गांवों व किसानों की तरक्की को पंख लग गए हैं।

By YS.Rana:

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