काम के बदले पेमेंट नहीं मिलने से परेशान पब्लिक हैल्थ के नामी ठेकेदार ने जल भर में डूब कर दी जान पुलिस जांच में जुटी-सुसाइड नोट में विभाग के दो अधिकारियों व शहर के एक पार्षद सहित पांच लोगों को ठहराया जिम्मेदार

सुसाइड नोट में विभाग के दो अधिकारियों व शहर के एक पार्षद सहित पांच लोगों को ठहराया जिम्मेदार
काम के बदले पेमेंट नहीं मिलने से परेशान पब्लिक हैल्थ के नामी ठेकेदार ने जल भर में डूब कर दी जान पुलिस जांच में जुटी-सुसाइड नोट में विभाग के दो अधिकारियों व शहर के एक पार्षद सहित पांच लोगों को ठहराया जिम्मेदार
सुसाइड नोट में विभाग के दो अधिकारियों व शहर के एक पार्षद सहित पांच लोगों को ठहराया जिम्मेदार
बी.एल. वर्मा द्वारा
नारनौल 9 मई 2019 :पब्लिक हैल्थ विभाग में सीवर व पानी की लाइन बिछाने आदि का काम करने वाले शहर के एक नामी ठेकेदार जयप्रकाश वर्मा ने रुपयों के लेन-देन को लेकर आत्महत्या कर ली। ठेकेदार ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें अपनी मौत के लिए पब्लिक हैल्थ के एक रिटायर्ड एक्सइन दलबीर सिंह, वर्तमान में विभाग के अधीक्षक मुकेश गुप्ता, नगर पार्षद केशव संघी, विभाग के ही एक ठेकेदार राजू उर्फ राजेंद्र व यहीं के व्यापारी तारकेश्वर शर्मा को जिम्मेदार ठहराया है।
ठेकेदार जयप्रकाश वर्मा गत दिवस 7 मई को सुबह साढ़े 9 बजे अपने घर से निकला था और रात को भी घर नहीं लौटा था। बुधवार को सुबह उनका शव नसीबपुर स्थित पब्लिक हैल्थ के पानी बूस्टर पर तैरता मिला है। गत दिवस 7 मई को सुबह घर से निकलने से पहले ठेकेदार जयप्रकाश वर्मा ने अपनी फर्म की पैड पर एक सुसाइड नोट लिखकर घर की अलमारी में रख दिया था। आठ पेज के इस सुसाइड नोट के सभी पन्नों पर ठेकेदार के हस्ताक्षर है तथा उस पर ठेकेदार ने 6 मई की तिथि अंकित  की है। जब यह सुसाइड नोट परिजनों के हाथ लगा तो उन्होंने ठेकेदार की अपने स्तर पर तलाश शुरू की और बीती देर शाम जब उनका सुराग नहीं लगा तो वे सुसाइड नोट को लेकर थाना में पहुंच गए। पुलिस ने ठेकेदार के बेटे रवि वर्मा की शिकायत के आधार पर सुसाइड नोट में नामजद अधिकारियों व लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके ठेकेदार की तलाश शुरू कर दी थी। आज बुधवार को सुबह पब्लिक हैल्थ के नसीबपुर स्थित बूस्टिंग स्टेशन के पानी में ठेकेदार जयप्रकाश वर्मा का शव मिला तो शहर में सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम करवाकर लाश उसके परिजनों को सौंप दी और गत रात्रि दर्ज किए गए मुकदमें मे आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे अन्य धाराएं भी शामिल करके इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
कुछ इस प्रकार लिखा है सुसाइड नोट में:
मैं जयप्रकाश वर्मा पुत्र सूरजभान वर्मा मोहल्ला शिवाजी नगर नारनौल का रहने वाला हूं। मैं बहुत मजबूर होकर आत्महत्या कर रहा हूं, बहुत दिनों की परेशानी झेली लेकिन मेरा पैस निकल नहीं पाया और कुछ लोगों ने मेरे साथ विश्वासघात किया, जिसके कारण मुझे ऐसा कलंकित कदम उठाना पड़ रहा है। इन शब्दों से शुरूआत करते हुए ठेकेदार ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि आत्महत्या का सबसे पहला कारण राजू ठेकेदार पुत्र रतनलाल ठेकेदार है।
मृतक ठेकेदार ने लिखा है कि मैं और राजू एक ही महकमे में ठेकेदारी का काम करते हैं। राजू ठेकेदार ने अपने पिता के नाम से नारनौल शहर में सीवर की लाइन बिछाने के लिए डेढ़ करोड का ठेका लिया था, इसके भाई के एक्सीडेंट के बाद इसका यह कार्य मैनें किया था। उसकी करीब 45 लाख रुपये की लागत आई थी। मृतक ने लिखा है कि अन्य कुछ काम करने तथा भुगतान आदि करने के बाद राजू ठेकेदार की तरफ उसके  37 लाख रुपये निकलते है, जो राजू ठेकेदार ने देने से साफ मना कर दिए। इसके अलावा वर्ष 2014-15 में जब उसके काम की एक पेमेंट आई तब तत्कालीन एक्सइन दलबीर सिंह ने मुझसे 6 महीने का नाम लेकर 22 लाख रुपये लिए थे। समय निकलता गया और वर्ष 2017 तक दलबीर सिंह ने केवल दो लाख रुपये ही लौटाये। मृतक ने लिखा है कि उसने दलबीर सिंह से कहा कि उसने लाखों रुपये राजू ठेकेदार ने मार लिये हैं, वह बीमार है और दवा के पैसे भी नहीं है। कई बार चक्कर लगाने के बाद भी एक्सइएन ने रुपये देने बाबत कहा कि होंगे तब दूंगा।
ठेकेदार जयप्रकाश वर्मा ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि  विभाग में उसके काफी काम हो गए थे, जिनके एग्रीमेंट नहीं बन पाये थे। विभाग में उस समय डिवीजन 2 में अधीक्षक पद पर कार्यरत मुकेश गुप्ता ने एग्रीमेंट बनवाने की एवज में तीन बार करके साढ़े चार लाख रुपये लिए थे। इसके अलावा उसके 58 हजार रुपये का एक बिल वास करवार रुपये खुद रख लिए। इतना होने के बाद भी उसने उसके कामों का एग्रीमेंट नहीं बनवाये और ना ही उसके पैसे लौटाये। एग्रीमेंट ना बनाने की वजह से उसके लाखों के बिल विभाग में फंस गए हैं। इन सबके अलावा ठेकेदार जयप्रकाश वर्मा ने अपनी मौत के लिए नगर पार्षद केशव संघी एडवोकेट व एक व्यापारी तारकेश्वर शर्मा को भी जिम्मेदार ठहराया है। उसने लिखा है कि केशव संघी से उसने दो लाख रुपये उधार लिये थे, जिसमें से उसने तीन बार करके एक लाख 35 हजार रुपये लौटा दिए। इसके बाद भी एडवोकेट केशव संघी ने उसे 7 लाख रुपये का नोटिस भेज दिया। इसी प्रकार तारकेश्वर शर्मा नामक एक व्यक्ति से उसने 6 लाख रुपये लिये थे। यह व्यक्ति सुबह-सुबह उसके घर आकर पैसों के लिए प्रताडित करने लगा और इन पैसों के बदले अभी तक साढ़े 11 लाख रुपये वसूल चुका है। इतना देने के बाद तारकेश्वर ने उसकी तरफ मूल से ज्यादा बकाया निकाल रखे हैं। ठेकेदार ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है इन सब कारणों की वजह से ही वह आत्महत्या कर रहा है।

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