किसानों की आपदा की हालात में सहायता करने के लिए किसान कल्याण कोष बने : डा. अभय सिंह यादव

किसानों की आपदा की हालात में सहायता करने के लिए किसान कल्याण कोष बने : डा. अभय सिंह यादव नारनौल,20 फरवरी,2020:हरियाणा विधानसभा की तीन दिन की हुई बजट पूर्व चर्चा के दौरान नांगल चौधरी के विधायक डा. अभय सिंह यादव ने विभिन्न मुद्दों पर विकास संबंधी सुझाव दिए।

सबसे पहले कृषि विभाग पर दिए गए विशेष सुझावों पर डा. यादव ने कहा कि किसानों को दिए जा रहे मृदा स्वास्थ्य कार्ड एक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। किसान को उसकी पूरी जानकारी और पूरा लाभ देने के लिए प्रत्येक मृदा कार्ड की बारीकी से जांच की जाए व जांचने के बाद किसान को उचित मार्गदर्शन दिया जाए। खाद व बीजा आदि की विस्तृत जानकारी किसान को उपलब्ध करवाई जाए तो कृषक को आधुनिक व वैज्ञानिक ढंग से कृषि करने में बड़ा सहयोग मिलेगा। इससे किसान की आय बढ़ेगी।

इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि किसानों को आपदा की हालत में मदद करने के लिए एक विशेष कोष का निर्माण किया जाए। इसे किसान कल्याण कोष का नाम दिया जा सकता है। यह राशि विशेषकर उन लोगों के लिए खर्च की जाए जिनके पास जमीन नहीं है और जमीन पर आधारित काम करते थे और जिनके धंधे बंद हो गए हैं।

उदाहरण के तौर पर चमड़े का काम करने वाले, लकड़ी का काम करने वाले व मिट्टी का काम करने वाले परिवार। इन सभी लोगों को रोजगार की कमी है। ऐसे सभी लोगों को इस कल्याण कोष से मदद की जाए। वहीं अन्य सुझाव में उन्होंने कहा कि असामयिक मृत्यु होने पर सरकार की योजना के अनुसार उसे आर्थिक सहायता दी जाती है।

उन्होंने कहा कि जिन परिवार में एक ही कमाने वाले व्यक्ति की प्राकृतिक मौत हो जाती है उसके लिए भी इस स्कीम को लागू किया जाना चाहिए। क्रेशरों से होने वाले प्रदूषण की समस्याओं पर बोलते हुए डा. यादव ने कहा कि गांवों के चारों तरफ  बिना किसी योजना के जगह-जगह पर कै्रशर लगाए जा रहे हैं।

विशेषकर अरावली और शिवालिक की पहाडिय़ों का जिक्र करते हुए  उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में बहुत क्रेशर लगे हुए हैं और इन कै्रशरों को किसी भी तरह से किसी भी जगह पर लगाने की जो प्रथा चली आ रही है उसको तुरंत बंद की जाए।

उन्होंने इसके नुकसान को गिनाते हुए कहा कि आसपास के इलाकों की फसलों में धूल जम जाती है तथा जिसके कारण फूल नष्ट होने के कारण अनाज ठीक से नहीं पक पाता। यदि कैशर जोन के आसपास के गांव के लोगों के स्वास्थ्य की यदि जांच की जाए तो यह पता लगेगा कि कितने लोग संक्रमण की बीमारी से ग्रस्त हैं। इसके लिए एक विशेष योजना बनाई जाए और इस बात का उपाय ढूंढा जाए।

डा. यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि के्रशर लगाने में उन्हें कोई एतराज नहीं है लेकिन के्रशर अनाप-शनाप जगह पर अंधा-धूंध लगाने पर सख्त ऐतराज है और सरकार इस पर तुरंत ध्यान दें।

क्षेत्र में आधारभूत ढांचा के विकास के लिए मुख्यमंत्री को बताया कि मुंबई-दिल्ली फ्रेट कोरिडोर के बनने के बाद में महेंद्रगढ़ जिला एक उद्योग के लिए बहुत ही उचित और सक्षम क्षेत्र बनने जा रहा है। यहां रेलवे सुविधा के साथ-साथ तीन नेशनल हाईवे बनने जा रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है।

आगामी समय में इस क्षेत्र में उद्योग की भारी क्षमता होगी। यहां सस्ती जमीन और सस्ती लेबर उपलब्ध है अत: सरकार को चाहिए कि विशेष प्रयासों से इस क्षेत्र में आधारभूत ढांचा का और विकास किया जाए ताकि आगामी समय में यह क्षेत्र पड़ोस में स्थित नीमराणा और बहरोड की प्रतियोगिता में आते हुए एक बहुत बड़े औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित हो।

इस 3 दिन की चर्चा के दौरान डा. यादव ने कुल 6 बार अपने विचार रखें और विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखते हुए अपने क्षेत्र और अपने प्रांत के विकास के लिए अनेक बहुमूल्य सुझाव दिए ( बी.एल. वर्मा / सुरेंद्र व्यास द्वारा  )

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