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कोच डा. वीरेन्द्र शास्त्री बेस्ट कोच अवार्ड से सम्मानित

कोच वीरेन्द्र शास्त्री को मिला बेस्ट कोच का अवार्ड प्रदान करते राह ग्रुप फाउंडेशन के पदाधिकारीगण।
-अवार्ड प्राप्त करके नारनौल पहुंचे कोच डा. वीरेन्द्र शास्त्री का स्कूल में हुआ भव्य स्वागत
त्रिभुवन वर्मा द्वारा :
नारनौल,25 सितंबर 2019।:  कुश्ती खेल में नामवर खिलाडिय़ोंं की फौज खड़ी करने वाले कोच वीरेन्द्र कुमार शास्त्री को राह ग्रुप फाउंडेशन की ओर से बेस्ट कोच अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान हिसार में आयोजित एक अनौपचारिक कार्यक्रम में राह ग्रुप फाउंडेशन के चेयरमैन नरेश सेलपाड़ व केश कलां एवं कौशल विकास बोर्ड के निदेशक नरेश सेलपाड़ ने प्रदान किया।

इस दौरान हरियाणा ओलम्पिक संघ के महासचिव बिजेन्द्र लोहान, बीआरसीएम एजुकेशन ग्रुप के निदेशक डा. एस. के. सिन्हा, पीसी ज्वैलर्स के प्रबंधक सतपाल माचिवाल, सह-प्रबंधक सीमा शेखावत, प्राचार्य राजबीर भाटीवाल, अशोक गुप्ता मोनालिसा, सचिन सोनी, दीपक व अनिल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। अवार्ड प्राप्त करके कोच वीरेन्द्र शास्त्री का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसीरपुर में भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान मुख्याध्यापक सोमदत्त यादव, प्रवक्ता अर्चना नेहरा, डी.पी. रामस्वरुप, मौलिक मुख्याध्यापक चन्दगीराम, राजेन्द्र सिंह, पूर्व सरपंच विक्रम सिंह, एबीआरसी निर्मला देवी, नवीन कुमार, सीमा शर्मा, रेणू, ज्योति, सीमा, मनोज, कलावति व बसीरपुर के वर्तमान सरपंच सुनील कुमार ने कोच वीरेन्द्र कुमार शास्त्री की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी व जोरदार स्वागत किया।

यह अवार्ड मिलने पर बुधवार को गांव बसीरपुर पहुंचे कोच डा. वीरेन्द्र कुमार शास्त्री ने राह ग्रुप फाउंडेशन व अपने सह कर्मियों का आभार जताया है। उन्होंने कहा है कि राह ग्रुप फाउंडेशन के इस सम्मान से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। वे भविष्य में खेलों को बढ़ावा देने, बेटियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दिलवाने, कन्या शिक्षा के प्रसार, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, विद्यार्थियों में तकनीकी कौशल विकसित करने, खेलों को बढ़ावा देने व गरीब विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने, देश को पालीथिन मुक्त बनाने व स्वच्छता की अलक जगाने जैसी राह ग्रुप फाउंडेशन की विभिन्न मुहिमों में भी अपना विशेष योगदान अवश्य देंगे।
फिल्म दंगल से भी प्रेरक है कोच की कहानी:
राह ग्रुप फाउंडेशन की ओर से बेस्ट कोच अवार्ड से सम्मानित कोच वीरेन्द्र सिंह की कहानी हिन्दी फिल्म दंगल से भी अधिक प्रेरक है। मुख्य रुप से संस्कृत प्रवक्ता को बचपन से ही शौक कि वो कुश्ती ऐसे खिलाडिय़ोंं की फौज तैयार करें जो कि विश्व स्तर पर देश व प्रदेश का नाम रोशन कर सके। नारनौल के निकटवर्ती गांव जयसिंह पुरा में युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए वीरेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों को कुश्ती के दांव पेच सिखाने आरंभ किए। पहले तो ग्रामीणों ने उसका मजाक उड़ाया। मगर बाद में वर्ष 2003 में तत्कालीन सरपंच कृष्ण कुमार ने अपने खेत में ही कोच को अखाड़ा बनाने के लिए जमीन दे दी। उसके बाद से ही कोच वीरेन्द्र कुमार प्रत्येक वर्ष खेल व खिलाडिय़ोंं के विकास के लिए लगातार प्रयास करते आ रहे हैं। वर्तमान में उनकी तरफ से तैयार 50 से अधिक खिलाड़ी नेशनल स्तर पर अपना प्रदर्शन कर चुके हैं। साथ ही दो दर्जन के करीब युवा इस खेल के माध्यम से सरकारी नौकरी पा चुके हैं।