गृहस्थ में रहकर मानव सेवा ही भगवान की सच्ची भक्ति है: स्वामी धर्मदेव

गृहस्थ में रहकर मानव सेवा ही भगवान की सच्ची भक्ति है: स्वामी धर्मदेव

गांव धनौंदा में भक्तों को प्रवचन देते साध समाज के महा मंण्डलेश्वर स्वामी धर्मदेव पटौदी।
बी.एल. वर्मा द्वारा :
कनीना, 3दिसम्बर,2019:गृहस्थ में रह कर मानव की सेवा करना ही भगवान की सच्ची भक्ति है, क्योंकि हमारे वेद और शास्त्रों में इस बात का प्रमाण है कि गृहस्थ आश्रम भी वनों में जाकर पूजा करने तथा तपस्या करने वालों से कहीं भी कम नहीं है। उक्त विचार देश के साध समाज के महा मंण्डलेश्वर स्वामी धर्मदेव पटौदी ने मंगलवार को खण्ड के गांव धनौन्दा में परम संत शास्त्री संजीव कुमार के घर पर आयोजित आशीर्वाद कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर स्वामी धर्मदेव ने महिला एवं पुरुषों को सम्बोधित करते हुए कहा कि गृहस्थ आश्रम सभी आश्रमों में सबसे बड़ा होता है, क्योंकि इस आश्रम में पैर रखते ही विभिन्न प्रकार की परीक्षाएं शुरू हो जाती है, लेकिन ग्रस्थी महिला एवं पुरुष को भगवान का ध्यान करते हुए धैर्य के साथ सुसंस्कारित होते हुए अपना कार्य करना चाहिए। इसके बाद ही मानव एक सफल गृहस्थी कहलाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मानव अपने परीवार को छोडक़र वनों में जाकर तप-तपस्या करते हुए भगवान को प्राप्त करता है। ठीक उसी तरह एक अच्छा ग्रस्थी भी परिवार में रहकर वेदानुकुल अपने ग्रस्थ धर्म का पालन करते हुए, वन में जाकर तपस्या करने वाले साधू से कहीं ज्यादा आगे होता है, इस लिए हमें कभी इस बात पर अपने आपको कोसना नहीं चाहिए कि गृहस्थ में रह कर हम कुछ नही कर सकते है। स्वामी जी ने बताया कि ग्रस्थ आश्रम हो या संत आश्रम तप तो सभी में करना पड़ता है, इसलिए जिसको भगवान ने जिस आश्रम के लायक समझा है उसे वही रह कर अपने धर्म का पालन करना चाहिए। इस अवसर पर परम संत संजीव कुमार ने भी कहा कि जिस गांव की धरा पर तथा जिस घर में संतो पर चरण पड़ते उससे उनका ही नहीं, बल्कि आस-पास का भ उधाहर हो जाता है। इस अवसर पर सैकड़ो ग्राम वासियों ने स्वामी धर्मदेव को गांव धनौन्दा में पहुंचने पर उनका फूल-मालाओं से भव स्वागत किया और गांव की तरफ से साल भेंटकर मान सम्मान किया गया। इस अवसर पर स्वामी उमानन्द शास्त्री संजीव कुमार, मार्केट कमेटी कनीना के पूर्व चेयरमैन व गांव धनौन्दा के पूर्व सरपंच ठाकूर रत्तन सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी ठाकुर अत्तरलाल, अशोक कुमार शास्त्री, मोक्ष शास्त्री, तिलकराज, विजय शास्त्री, डाक्टर फतेचन्द दायमा, राजेन्द्र नम्बरदार, पूर्व सरपंच सुरेन्द्र सिंह, चन्दगीराम दायमा, रिटायर्ड प्राचार्य ओमप्रकाश शर्मा, हरीश शर्मा, माडूराम दायमा, मक्कड़ सिंह गुढ़ा के अलावा अन्य ग्राम वासी उपस्थित थे।

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