Haryana

ग्रीन कोरिडोर महेन्द्रगढ़, भिवानी व चरखी दादरी के विकास की नई इबारत लिखेगा

मार्ग के बनने के बाद लोगों के लिए चंडीगढ़ होगा नजदीक
-कोटपूतली से इस्माइलपुर के बीच के एक्सप्रेस वे के कार्य ने पकड़ी गति 
त्रिभुवन वर्मा द्वारा
नारनौल 29नवम्बर 2018
नारनौल से सीधे चण्डीगढ़ जाने के लिए बनाए जा रहे एक्सप्रेस-वे के कार्य ने अब गति पकड़ ली है। इस एक्सप्रेस-वे में नारनौल के पास पूर्व निर्धारित मार्ग में कुछ बदलाव करने के बाद अब इसे अंतिम रूप दिया जा चुका है। ज्ञातव्य है कि उक्त ग्रीन कोरिडोर को जिला महेन्द्रगढ़ तथा भिवानी-चरखी दादरी के विकास की नई इबारत लिखने वाला मिल का पत्थर माना जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे को ग्रीन कोरिडोर भी कहा गया है। इस मार्ग को 152 डी एक्सप्रेस-वे का नाम दिया गया है। इस मार्ग को न केवल अंतिम रूप दिया जा चुका है बल्कि इस सड़क मार्ग में आने वाली जमीन के मुआवजे की भी तैयारी की जा रही है।
एक्सप्रेस वे के मार्ग में किया आंशिक बदलाव:
राजस्थान के कस्बा कोटपूतली से चण्डीगढ़ वाया नांगल चौधरी, नारनौल, महेन्द्रगढ़, चरखी दादरी, बौंध, मदीना, जुलाना, सफीदो, कैथल, तथा पेहोवा व अम्बाला के बीच इस्माइलाबाद के पास राष्टï्रीय राजमार्ग नम्बर एक से जोड़ा जाएगा। इसके मुख्य मार्ग में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन नारनौल के पास पहले जहां इसकी लाजस्टिक हब के मार्ग से क्रोसिंग गांव नांगतिहाड़ी के पास होनी थी वह अब गांव बड़कोदा व बडग़ांव के पास होगी। इस मुख्य चौराहे के लिए लगभग 60 एकड़ भूमि का अलग से अधिग्रहण किया गया है वहां पर होटल, पार्क तथा अन्य सुविधाओं वाला केन्द्र बनेगा। इस मुख्य क्रोसिंग से यह एक्सप्रेस-वे जिला के विभिन्न गांवों जैसे नूनी-सलूनी व गुवाणी की सीमा, सीहमा गांव, अटाली, दोंगड़ा अहीर-भालखी के बीच, देवास, चितलांग, मेधनवास, झगड़ोली, बेचावास, खेड़ी, तलवाना तथा बागोत व पोता आदि गांवों की भूमि से होते हुए चरखी दादरी जिला के गांव चिडिय़ा के पास से गुजरेगा।
सभी शहरों को छोड़ दिया गया:
इस एक्सप्रेस वे के मार्ग में वैसे तो अनेक जिले व शहर आएंगे, लेकिन यह मार्ग किसी भी शहर से नहीं गुजरेगा। इसके साथ ही सभी गांवों को भी छोड़ दिया गया है। सभी मुख्य शहरों से जोडऩे के लिए इस मार्ग पर ज्यादा क्रोसिंग नहीं होंगे। पूरे मार्ग में लगभग 6 मुख्य क्रोसिंग होंगे। लेकिन सभी क्रोसिंग पर फ्लाई ओवर बनाए जाएंगे।
नवीनतम डिजाइन का होगा यह एक्सप्रेस वे-इस एक्सप्रेस वे की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसकी डिजाइन आधुनिकतम होगी। जिस पर दौडऩे वाले वाहन की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे की हो सकती है। यह मार्ग बिना मोड़ के बनाया जाएगा। इस पर दौडऩे वाले वाहन चालक की गलती पर चालान काटने की तकनीकी भी आधुनिक होगी। इस मार्ग पर टोल टेक्स भी लगेगा। टोल टेक्स की प्रणाली भी आधुनिक होगी। जिसमें जो वाहन जहां से प्रवेश करेगा वहां उसे एक टोकन दिया जाएगा तथा जहां वह वाहन उतरेगा वहां पर उस टोकन पर अंकित दूरी के अनुसार उसका टोल टेक्स वसूल किया जाएगा।
नारनौल से पहले भी किया है बदलाव:
यह मार्ग कोटपूतली से शुरू होगा तथा नांगल चौधरी के पूर्व से होता हुआ गांव सिरोही बहाली व कालिया का नांगल के पास नारनौल वाले मार्ग पर चढ़ेगा। गांव ढाणी बाठोठा से सीधा गांव खानपुर से पश्चिम से होता हुआ गांव मंढ़ाणा के पश्चिम व गांव सेका के पूर्व से होता हुआ गांव भूषण कला व भूषण खूर्द के बीच से होता हुआ रेवाड़ी के राष्टï्रीय राजमार्ग नम्बर 11 पर जाकर मिलेगा। इस मार्ग में गांव ढाणी बाठोठा के पास कुछ नया बदलाव किया गया है। पहले यह मार्ग गांव मांदी की नदी से होता हुआ गांव खानपुर के पास जाता था लेकिन अब यह मार्ग गांव ढाणी बाठोठा से राष्टï्रीय राजमार्ग नम्बर 148 से कट करते हुए सीधा गांव खानपुर के पश्चिम में जोड़ा जाएगा। गांव खानपुर के पास एक बड़ा हब बनाया जाएगा। जिसके लिए अब अलग से लगभग 35 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसलिए यहां के चार गांव जिनमें गांव मांदी, ढाणी बाठोठा, खानपुर तथा मंढाणा की भूमि के अधिग्रहण का काम दोबारा से किया जाएगा। सेक्शन 3 डी किया जारी-राष्टï्रीय राजमार्ग अथॉर्टी द्वारा लगभग चार मास पूर्व सेक्शन 3 ए (स्माल ए), सेक्शन 3 ए (केपिटल ए), 3 डी तथा 3 ई का काम हो चुका है। सेक्शन 3 ई के जारी होने के बाद केवल संबंधित किसानों को जमीन के मुआवजे की कार्रवाई होती है। किस किसान की कितनी भूमि इस सड़क मार्ग में आई है, इसके लिए नारनौल के लघु सचिवालय में रिटायर्ड कानूनगो आदि की ड्यूटी लगाई गई है। जो कि दिन-रात करके इस काम को जल्द से जल्द पूरा करने में लगे हुए हैं।
किसानों को कितना मिलेगा भूमि का मुआवजा:
गत कुछ महीनों से यहां के अनेक गांवों के किसानों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि उन्हें इस सड़क मार्ग में अधिग्रहण की गई भूमि का मुआवजा उनके पड़ोसी गांवों से कम मिल रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन ने इस पर दोबारा से विचार करने का भरोसा दिलाया है। इस संदर्भ में यह बात सामने आई है कि कुछ गांवों को मुआवजा देने के लिए कलेक्टर रेट को आधार माना है तथा कुछ गांवों में बाजार भाव को आधार माना है। अर्थात उस गांव में वास्तव में भूमि किस भाव से बिक्री की जा चुकी है। इस कलेक्टर रेट तथा बाजार भाव से किसानों को कहीं दो गुणा तो कहीं अढ़ाई गुणा मुआवजा दिया जाएगा।
दो साल में बनकर हो जाएगा तैयार:
इस एक्सप्रेस वे को बनाने का काम जल्द ही शुरू होने जा रहा है। इसे बनवाने के लिए टेण्डर जारी कर दिया गया है तथा इसे दो साल में बनाकर तैयार कर दिया जाएगा। नारनौल के लोगों को गुरुग्राम जाने में लगभग दो घंटे का समय लगता है। लेकिन कोटपूतली के पास हरियाणा बार्डर से अम्बाला के पास के गांव इस्माईलाबाद की दूरी लगभग 220 किलोमीटर हो जाएगी। इसके बाद गांव इस्माईलाबाद से चंडीगढ की दूरी मात्र 77 किलोमीटर रह जाएगी।
अब लगेगा जिला महेन्द्रगढ़ को विकास के पंख:
यह एक्सप्रेस वे जिला महेन्द्रगढ़ के विकास के लिए एक नया मील का पत्थर साबित होगा। इस मार्ग के बनने के बाद यहां के लोगों के लिए चंडीगढ़ काफी नजदीक हो जाएगा तथा जो लोग यहां से चंडीगढ़ जाना चाहते हैं वे अब रात को जाने की बजाय सुबह जाना पसंद करेंगे। इसके साथ ही चंडीगढ़ में बैठा वह अधिकारी जो दशकों से इस जिले को काला पानी समझते रहे तथा चंडीगढ़ से यहां की दूरी काफी ज्यादा होने के कारण आने से कतराते रहेे, वे अब यहां आने में आसानी समझने लगेंगे। पहले यहां से चंडीगढ़ की दूरी 450 किलोमीटर थी वह अब लगभग 300 किलोमीटर तक रह जाएगी। इससे पहले यहां के जो लोग चंडीगढ़ जाते थे तो या तो वे दिल्ली होते हुए जाते थे या फिर रोहतक, गोहाना, सोनीपत होते हुए जाते थे। लेकिन अब उक्त सभी शहरों से गुजरने से छूट मिल जाएगी।
152 डी एक्सप्रेस-वे का नक्शा।