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जवानों के सम्मान में पुलवामा जाकर  शहीदों को श्रद्धांजलि दे लहराया तिंरगा

एक ईंट शहीद के नाम अभियान के संजीव राणा ने पुलवामा जा किया शहीदों का सम्मान
कारगिल व पुलवामा की मिट्टी से होगा तिलक, देश के सम्मान व वोट के अधिकार के प्रयोग की दिलाएंगे शपथ
सैनिकों के सम्मान के लिए अधिक से अधिक नौजवानों को किया जाएगा प्रेरित
संजीव राणा  द्वारा :
होशियारपुर, 31 मार्च,2019:  जम्मू-कश्मीर के जिस स्थान पर देश के 40 बहादुर जवानों ने वीरगति प्राप्त की, उसी स्थान पर उन्हें श्रद्धाजंलि देकर वहां उनके सम्मान में तिरंगा लहराया गया। जी हां, हम बात कर रहे हैं पुलवामा की उस धरती की, जो सी.आर.पी.एफ. के 40 वीर जवानों के रक्त से लाल हुई थी लेकिन विकट परिस्थिति होने के बावजूद उसी धरती पर उन सैनिकों को सम्मान देने के लिए एक ईंट शहीद के नाम के संयोजक संजीव राणा ने वहां जाकर न सिर्फ उन्हें श्रद्धाजंलि दी बल्कि उनके सम्मान में तिरंगा भी लहराया।
जानकारी देते हुए संजीव राणा ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में इस घटनाक्रम ने न सिर्फ उन्हें बल्कि देश के हर व्यक्ति को झकझोड़ के रख दिया। चूंकि वे शहीदों के सम्मान में वे पहले से ही कार्यरत है, ऐसे में पुलवामा के शहीदों को उनके शहीदी स्थान पर श्रद्धांजलि देना उनके लिए गौरवमयी पल था। श्री राणा ने बताया कि कश्मीर में हालात ज्यादा अच्छे नहीं रहे और स्थानीय लोगों में देश के प्रति सम्मान का अभाव है।
अपने आप को भारत का हिस्सा नहीं मान रहे कुछ लोग
श्री संजीव राणा ने कहा कि जब वे श्री नगर पहुंचे तो पुलवामा जाने के लिए एक राहगीर से उन्होंने रास्ता पूछा तो उसने मुझसे पूछा कि क्या आप हिंदुस्तान से आए हो, उसका यह सवाल सुनकर वे ं हैरान हो गए, क्योंकि वे तो अपने देश में ही हैं और वह उनसे पूछ रहा है कि क्या आप हिंदुस्तान से आए हो, इस पर उन्होंने पूछा कि वे तो हिंदुस्तान में है, तो वह राहगीर बिना कुछ बताए आगे चला गया। उसके तुंरत बाद वे पुलवामा के उस स्थान की ओर निकल पड़े जहां जवानों की शहादत हुई थी। जब शहीदी स्थान पर पहुंच कर उन्होंने फूलों का हार श्रद्धांजलि देने के लिए निकाला तो स्थानीय लोगों ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया। उन्होंने वहां पास खड़े सैनिक से पूछा तो उसने भी कहा कि यह संवेदनशील स्थान है, आप यहां ज्यादा देर तक न रु को, लेकिन उन्होंने किसी बात की परवाह न करते हुए सैनिको को श्रद्धांजलि दी और तिरंगा लहराया। श्री राणा ने कहा कि वहां कुछ राजनीतिक लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के चक्कर में जनता को गुमराह कर रहे हैं।
देश व लोकतंत्र के सम्मान में चलाया जाएगा तिलक अभियान
श्री संजीव राणा ने बताया कि पुलवामा में उन्होंने न सिर्फ सैनिको को श्रद्धासुमन अर्पित किए बल्कि उनके सम्मान में तिरंगा भी फहराया। उन्होंने बताया कि पुलवामा में जहां सी.आर.पी.एफ के जवानों की शहादत हुई है, वे वहां की मिट्टी भी अपने साथ लाएं हैं। इससे पहले वे कारिगल के उस स्थान से मिट्टी लेकर आए थे जहां  सैंकड़ों सपूतों ने देश की खातिर अपने प्राणों की आहूति दी। उन्होंने बताया कि देश के नौजवानों में सेना के प्रति सम्मान की भावना पैदा करने व लोकतंत्र की मजबूती के लिए  एक ईंट शहीद के नाम अभियान की ओर से कारगिल व पुलवामा की उस मिट्टी से तिलक अभियान शुरु  किया जाएगा, जिस मिट्टी में सैंकड़ों सपूतों ने देश की खातिर अपने प्राणों की आहूति दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत अधिक से अधिक  होशियारपुर के नौजवानों को जोड़ा जाएगा। संजीव राणा ने बताया कि यह मिट्टी हमारा अभिमान है और नौजवानों में देश के मान के को लेकर गर्व की भावना पैदा करने के लिए इस अभियान को शुरु  किया गया है। श्री राणा ने कहा कि नौजवानों को नशे जैसी बीमारी से दूर कर देश व समाज की सेवा करने की भावना पैदा करना बहुत जरु री है, जिसके लिए हमारी ओर से हमेशा प्रयास रहता है।
सैनिकों के सम्मान में बना रहे हैं शहीदी स्मारक
गौरतलब है कि एक ईंट अभियान के अंतर्गत बिना सरकार की आर्थिक मदद के लोगों के सहयोग से ही शहीदी स्मारकों का निर्माण भी करवाया जा रहा है। शहीद स्मारक सिर्फ स्मारक तक ही नहीं बल्कि नौैजवानों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन रहे हैं, क्योंकि वहां स्मारक के साथ-साथ नौजवानों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए भी केंद्र बनाए जा रहे हैं। हरियाणा में दो स्मारकों का निर्माण करवाया गया जहां एक स्मारक में अखाड़ा व दूसरे स्मारक में पार्क बनाया गया। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में भव्य शहीदी स्मारक बनाया जा रहा है, जिसके लिए भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद, राज्य पाल हिमाचल प्रदेश आचार्य देवव्रत, मुख्य मंत्री हिमाचल प्रदेश श्री जय राम ठाकुर ने भी अपनी ओर से एक ईंट भेंट की थी। यहां शहीदी स्मारक के अलावा लाईब्रेरी, गौरव संग्रहालय, ओपन थियेटर आदि का निर्माण करवाया जा रहा है। इस अभियान की विशेषता यह है कि इसके निर्माण के लिए किसी से भी सीधे रु प में पैसा नहीं लिया जा रहा और न ही पर्ची काटी जा रही है, बल्कि जो इसमें योगदान देना चाहता है वह जरु रत के मुताबिक सीधे तौर पर मटीरियल दे सकता है या अपनी सुविधा के हिसाब से लेबर को अपने हाथ से दिहाड़ी दे सकता है। इसी तरह आज तीसरा शहीदी स्मारक बन रहा है जिसका 80 प्रतिशत कार्य मुकम्मल हो चुका है।