Haryana

जैन समाज ने मनाया क्षमावानी पर्व कार्यक्रम

नारनौल मोहल्ला नलापुर स्थित जैन मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन गणमान्य जन।

बी.एल. वर्मा द्वारा :
नारनौल 15 सितंबर 2019। स्थानीय मोहल्ला नलापुर स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विधासागर महाराज के मंगल आशीर्वाद व संदीप भैया के सानिध्य में चल रहे दशलक्षण पर्व मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर एस.पी. जैन ने की व मंच का संचालन अरूण कुमार जैन ने किया। क्षमावानी पर्व पर ब्रह्मचारी संदीप भैया ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन धर्म में दशलक्षण पर्व का बहुत महत्व है। इसे पयुर्षण पर्व भी कहा जाता है। इन 10 दिनों के दौरान प्रथम दिन उत्तम क्षमाए दूसरा दिन उत्तम मार्दव, तीसरा दिन उत्तम आर्जव, चौथा दिन उत्तम सत्य, पांचवां दिन उत्तम शौच, छठा दिन उत्तम संयम, सातवां दिन उत्तम तप, आठवां दिन उत्तम त्याग, नौवां दिन उत्तम आकिंचन तथा दसवां दिन ब्रह्मचर्य के रूप में मनाया जाता है। यह आत्मशुद्धि करने का पर्व है, जो 10 दिनों तक मनाया जाता है। इसके साथ ही अंतिम दिन क्षमावाणी पर्व के रूप में मनाया जाता है। दसलक्षण पर्व एक ऐसा पर्व है, जिसमें आत्मा भगवान में लीन हो जाती है। यह एक ऐसी क्रियाएं ऐसी भक्ति और ऐसा खोयापन है, जिसमें हर किसी को अन्न-जल तक ग्रहण करने की सुध नहीं रहती है। 10 दिनों तक तप करके अपनी आत्मा का कल्याण करने का मार्ग अपनाते हैं। वैसे भी सांसारिक मनुष्य को जरा-जरा सी बातों में मान-सम्मान आड़े आता है। अत: हमें चाहिए कि हम कभी भी अपने पद प्रतिष्ठा का अहंकार न करें, हमेशा धर्म की अंगुली पकडक़र चलते रहे और जीवन के हर पल में भगवान को याद रखें, ताकि भगवान हमेशा हमारे साथ रह सकें। अपने इस अहंकार को जीतने के लिए जीवन में तप का भी महत्वपूर्ण स्थान है और तप के 3 काम हैं। अपने द्वारा किए गए गलत कर्मों को जलाना, अपनी आत्मा को निखारना और केवलज्ञान को अर्जित करना। अपने जीवन में ऊर्जा को मन के भीतर की ओर प्रवाहित करने का नाम ही तप है। अत: जीवन में अहं भाव के चलते हुई गलतियों को सुधारने का एक मात्र उपाय यही बचता है कि हम शुद्ध अंत: करण से अपनी भूलचूक को स्वीकार करके अपने और सबके प्रति विनम्रता का भाव मन में जगाएं और मन की शुद्धि करते हुए सभी से माफी मांगें। मन के बैर भाव के विसर्जन करने के इस अवसर को हम खोने न दें और इसका लाभ उठाते हुए सभी से क्षमा-याचना करें, ताकि हमारा मन और आत्मा शुद्ध हो सकें। साथ ही दूसरे के मन को भी हम शांति पहुंचा सकें। यही हमारा प्रयास होना चाहिए। भाग दौड़ भरी इस जिंदगी में हम अपने मन में हमेशा यह विचार बनाकर चलें कि इस दुनिया में मेरा कोई भी बैरी नहीं हैं और मेरा भी किसी से बैरभाव नहीं है। अगर कोई मेरे प्रति बैरभाव रखता हो तो तब भी मैं उसे क्षमा करता हूं और वह भी मुझे क्षमा करें। इस मौके पर प्रधान भगवान दास जैन, सचिव सुंदर लाल जैन, उपसचिव विजय जैन, संदीप जैन, विजय जैन, प्रमोद जैन, सुरेन्द्र जैन, राजकुमार जैन, अजीत प्रकाश जैन, अरूण जैन, रजत जैन, दीपक जैन, गोपाल जैन, कमलेश कुमार जैन, सुरेन्द्र जैन चौधरी समेत जैन समाज के अनेक लोग मौजूद थे।