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डिग्री आला सुथरों छोरो, रंडवों ही रह जावै से, छौरा नै कुण ब्याहवै, उर्रे तो नौकरी ब्याही जावै सै

सैदअलिपुर में नियारा परिदर्शन दोहा संग्रह का लोकार्पण व काव्य गोष्ठी आयोजित
बी.एल. वर्मा द्वारा :
नांगल चौधरी 22 अप्रैल 2019 :नांगल चौधरी खण्ड के गांव सैद अलिपुर स्थित महाशय रामजीलाल आर्य फार्मस पर आर्य समाज सैद अलिपुर के प्रधान एवं सेवानिवृत व्याख्याता कवि नंदलाल नियारा द्वारा लिखे दोहा संग्रह नियारा परिदर्शन का का लोकार्पण पूर्व कॉलेज प्राचार्य डॉ दलीप सिंह यादव ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजकीय बहुतकनीकी संस्थान नारनौल के प्राचार्य डी के रावत ने की। इस अवसर पर स्वामी सेवानंद विशिष्ठ अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी में अपनी रचना पढते हुए डॉ सत्यवीर मानव ने कहा कि  ‘पीडा मेरे घाव की, उसके दिल में टीस, मानव ऐसे मीत अब होते है दस-बीस’। इसी प्रकार रचनाकार राजेश प्रभाकर की रचना के बोल थे कि ‘मधुर सुहाने मद भरे, सपने लिए चुनाव, लेकर वादे खोखले, चला खेलने दाव’। जाने-माने दोहाकार रघुविन्द्र यादव ने अपनी रचना में कहा कि ‘रिश्वत बोली झूठ से, सुन ले करके गौर, कलियुग के इस दौर की, हम दोनों सिरमौर’। गजलकार प्रमोद वत्स ने कहा कि ‘कोयलों की देखकर जिद, आरियां हैरान है, जिन्दगी रूकती नहीं, दुश्वारियां हैरान हैं’। कवि सुनील पागल ने पढा कि ‘म्हारे हाथां मं हल थे, उनके हाथां मं बही, हम थोडे कमजोर थे हिसाब मं, न जाणु क्युकर म्हारी हलाई घटती गई उनके आंक बढते गए’। डा. छतर सिंह वर्मा अटेली की रचना के बोल थे ‘जीतना हो तो, जीत का गाना तराना, जीत लो उस मौत को भी जो तुम्हे आए डराना’। कवि कृष्ण कुमार ने पढा कि ‘डिग्री आला सुथरों छोरो, रंडवों ही रह जावै से, छौरा नै कुण ब्याहवै, उर्रे तो नौकरी ब्याही जावै सै’। दोहाकार नंदलाल नियारा ने कहा कि  ‘मिश्र ने लंबी सांस ले कर कहा हाय, आपके मुंह में बिना मीठे की चाय’। काव्य गोष्ठी का संचालन अहीवाल की शान दोहाकार रघुविंद्र यादव ने किया। श्री नंदलाल नियारा की पोत्री के नामकरण संस्कार के अवसर पर हुए इस दोहा संग्रह पुस्तक का विमोचन समारोह में वक्ताओं ने पुस्तक के लेखक नंदलाल नियारा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के संदर्भ में यह पुस्तक प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि श्री नियारा ने पुस्तक में सभी वर्गो का छूते हुए बेहद सरल भाषा में अपने दोहों की माला को पिरोया हैं। उन्होंने कहा कि जब हम जीवन के मूल्यों को खोते जा रहे है तो ऐसे में यह पुस्तक आने वाली पीढियों को एक प्रेरणा देने का काम करेगी। इस अवसर पर कलमकार रामपाल फौजी, सैदअलिपुर के सरपंच देशपाल नम्बरदार, हरीसिंह मास्टर, रघुबीर सैनी, अमर सिंह सरपंच, मास्टर भोलाराम समेत अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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