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नारनौल से गुजरते हैं दो नेशनल हाइवे, दोनों में से नहीं है छह व चार मार्गी मार्ग 

-नारनौल फोरलेन मार्गों को रहा है तरस, विकास में सडक़ों का रहता है मुख्य योगदान
-रेवाड़ी एवं दादरी में बने हैं फोरलेन मार्ग, नारनौल आज भी वंचित
बी.एल. वर्मा द्वारा
नारनौल 19 अप्रैल 2019  : जिला मुख्यालय से नेशनल हाइवे तो गुजरते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी छह मार्गी या आठ मार्गी होने तो दूर फोरलेन तक के मार्ग नहीं हैं। जबकि जिलों रेवाड़ी एवं दादरी में नारनौल से जाती सडक़ों को कई बार विस्तार दिया जा चुका है। लेकिन जिला मुख्यालय आज भी फोरलेन मार्गों को तरस रहा है। जबकि किसी भी प्रदेश या इलाके के विकास की तस्वीर उसकी सडक़ों में देखी जाती है। सडक़ मार्ग बेहतर नहीं होने का खामियाजा यह इलाका वर्षों से झेल रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि कई सरकारें आने और जाने के बावजूद यह दौर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा।
रेवाड़ी जिला पार करते ही सडक़ों की हालत खस्ता:
प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित महेंद्रगढ़ जिले के मुख्यालय नारनौल शहर के हृदय से दो नेशनल हाइवे गुजरते हैं। नेशनल हाइवे नंबर 11 सीधे दिल्ली को झुंझुंनू से जोड़ता है। इसी प्रकार नेशनल हाइवे 148 बी कोटपूतली से दादरी-रोहतक-भिवानी को जोड़ता है। नारनौल शहर से गुजरते से दोनों ही काफी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन दोनों मार्गों का अब तक विस्तार नहीं किया गया है। दिल्ली-गुरुग्राम से चलकर जब रेवाड़ी आते हैं, तब तक वहां की चकाचक एवं कई मार्गों में बंटी सडक़ों से गाडिय़ां सरपट दौड़ती है, लेकिन जैसे ही जिले रेवाड़ी को पार कर नारनौल की तरफ  बढ़ते हैं तो सडक़ों की हालत देखकर चालकों को रोना आता है।
सडक़ मार्ग की चौड़ाई कम होने से होते है हादसे:
जिला महेन्द्रगढ़ की सडक़ों की चौड़ाई अन्य जिलों की तुलना में घट जाती है। साथ में उनका साइज भी घट जाता है। सडक़ फोरलेन भी नहीं है। जबकि इस मार्ग पर वाहनों का रस बहुत ज्यादा रहता है और हमेशा हादसों का खतरा बना रहता है। कई बार सवारियों से भरी रोडवेज की बसें आगे निकलने के चक्कर में साइड वाले वाहनों से टकरा जाती है और हादसों को अंजाम देती रहती हैं। इस मार्ग पर हादसे भी बड़ी संख्या में होते रहते हैं, लेकिन जरूरत होने के बावजूद अब तक इस तरफ  ध्यान नहीं दिया गया है। इस मार्ग पर हादसों से बचने के लिए वाहन चालकों को बड़ी सावधानी से चलना पड़ता है तथा इस चक्कर में उन्हें देरी का सामना करना पड़ता है। शाम के समय इस मार्ग पर भारी संख्या में डंपर चलते हैं और वे किसी को साइड नहीं देते। उस समय तो सडक़ पर चलना ही दूभर हो जाता है।
रोहतक दादरी तक बना फोरलेन, आगे नहीं बढ़ा:
इसी प्रकार एनएच 148-बी भी कोटपूतली से दादरी को जोड़ता है। मगर बड़े कमाल की बात है कि रोहतक-दादरी तक फोरलेन मार्ग बना दिया, लेकिन उसे आगे नहीं बढ़ाया गया है। पिछली सरकार में करीब एक दशक पहले इस मार्ग को नारनौल के महावीर चौक से गांव कूकसी तक महज 12 किलोमीटर में ही फोरलेन बनाया गया था, लेकिन यह इससे आगे नहीं बढ़ा है। नेशनल हाइवे अथोरिटी दोनों मार्गों की जरूरत से वाकिफ है, लेकिन इनके लिए न तो कोई योजना है और न ही किसी बजट का प्रावधान किया गया है। जबकि देश में हुए विकास से साफ  झलकता है कि जहां-जहां सडक़ों का विस्तारीकरण हुआ। वहां-वहां विकास ने गति पकड़ी और उन इलाकों का कायाकल्प हो गया।
क्या कहना है लोगों का:
यहां की सडक़ों से नहीं लगता है ये सडक़ें नेशनल हाइवे की हैं। फोरलेन तो कोई है नहीं। जब सडक़ें बेहतर नहीं होंगी तो विकास कैसे होगा। इसी कारण यह जिला पिछड़ा हुआ है। नेता चुनाव जीतने के बाद भूल जाते हैं। सडक़ें ही किसी भी क्षेत्र के विकास का दर्पण होती हैं। नारनौल भले ही जिला मुख्यालय है, लेकिन यहां कोई नेशनल हाइवे अब तक चार मार्गी नहीं बन पाया है। ऐसे में विकास कैसे होगा। उन्होंने बताया कि नारनौल से दिल्ली, जयपुर व रोहतक को जाने वाले मार्गों की हालत खराब है। सडक़ें चौड़ी नहीं होने के कारण हमेशा हादसों का खतरा रहता है। वहीं देरी का सामना करना पड़ता है। नारनौल-रेवाड़ी रोड पर तो शाम को आठ बजे से ही डंपरों का कब्जा हो जाता है। डंपर इतनी ज्यादा संख्या एवं मनमाने ढंग से चलते हैं कि किसी को साइड नहीं देते। कई बार तो ये साइड भी मार देते हैं। इस बारे में एनएचएआई निरीक्षक विक्रम सिंह का कहना है कि इन सडक़ों के विस्तार की डिमांड भेजी हुई है। इनके मंजूर होने की उम्मीद है। जब ये प्रोजेक्ट मंजूर हो जाएंगे तो इन सडक़ों का विस्तार भी किया जाएगा।