न्यायाधीश एन.वी. रमना ने वेबिनार के माध्यम से जारी की हैंडबुक

न्यायाधीश एन.वी. रमना ने वेबिनार के माध्यम से जारी की हैंडबुक
-डीएलएसए में मानकीकरण एवं एकरूपता लाने के लिए जारी की हैंडबुक
-कोविड-19 के महामारी में विधिक सेवा पाधिकरणों ने आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए किया बेहतरीन कार्य

नारनौल,5जून:गरीब व कमजोर वर्ग को कानूनी सेवाएं और अधिक प्रभावी तरीके से सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण के चेयरमैन एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश एन.वी. रमना ने गत दिवस नई दिल्ली से वेबिनार के माध्यम से एक हैंडबुक (हैंडबुक ऑप फोरमेट, एनस्यूरिंग इफेक्टिव लीगल सर्विसिज) जारी की।
वेबिनार के माध्यम से हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों व जिलों की विधिक सेवाएं प्राधिकरण के चेयरमैन तथा सचिव मौजूद रहे। वहीं जिला विधिक सेवाएं महेंद्रगढ़ की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीश व डीएलएसए के चेयरमैन आर के सौंधी तथा मुख्य  न्यायिक दंडाधिकारी एवं डीएलएसए की सचिव कीर्ति जैन जुड़े हुए थे।
श्री रमना ने कहा कि लोक डाउन के कारण देश के गरीब व कमजोर तबके को बहुत तकलीफ  हुई है। बड़े स्तर पर माइग्रेशन हुआ है। जिस कारण कई परेशानियां पैदा हुई हैं। ऐसे में हमें लगातार काम करना होगा। अभी तक ट्रायल कोर्ट में काम करना शुरू नहीं हो पाया है। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए काम कर रहे हैं। इस महामारी के दौर में देश की विधिक सेवा पाधिकरणों ने आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
इस दौरान महिला उत्पीडऩ पर बाल शोषण पर देश भर में बने वन स्टॉप सेंटर द्वारा टेली सेवाओं के माध्यम पैनल पर नियुक्त अधिवक्ताओं ने कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई है। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा पाधिकरणों ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद महामारी के दौरा में देशभर में जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कम किया गया। यह हैंडबुक ऐसे काम में मानकीकरण एवं एकरूपता लाने के लिए जारी की गई है। इसमें सभी तरह के फार्मेट निर्धारित किए गए हैं। यह पुस्तिका मानव संसाधन के प्रबंधन के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। भविष्य में आने वाली मुश्किलों के लिए हमें तैयार रहना है तथा अपने कार्य के प्रति इसी प्रकार प्रतिबद्ध रहना है। उन्होंने बताया कि देश में 58797 विचाराधीन तथा 20972 दोषियों को विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा कानूनी प्रतिनिधित्व देने के बाद पेरोल दी गई। इसके अलावा 1559 घरेलू हिंसाए 16391 दोषियोंए 1882 मजदूरों तथा 310 किराएदारो को कानूनी सहायता दी गई। राष्ट्रीय कानूनी हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर 15100 लगातार कार्यरत है ताकि कोई भी न्याय से वंचित न रहे।
इस मौके पर राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव अशोक कुमार, पूर्व सदस्य सचिव नालसा आलोक अग्रवाल, नालसा के निदेशक सुनील चौहान व अन्य न्यायिक अधिकारी मौजूद थे ( बी.एल. वर्मा)

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