प्राचीन समय में जो कार्य और वस्तु सोच से परे होती थी उसे चमत्कार माना जाता था

प्राचीन समय में जो कार्य और वस्तु सोच से परे होती थी उसे चमत्कार माना जाता था

प्राचीन समय में जो कार्य और वस्तु सोच से परे होती थी उसे चमत्कार माना जाता था,तथा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देना हर बार संभव नहीं होता था। विज्ञान के आगमन ने इसे संभव कर दिखाया है।विज्ञान तर्क पर आधारित होता है और सच्चाई की कसौटी पर परखा जा सकता है। विज्ञान ने खुली आंखों से देखे सपनों को सच कर दिखाया है ।

इसलिए विज्ञान एक अद्भुत एहसास माना जा सकता है। विज्ञान ने मनुष्य को दुखों से छुटकारा दिलाने, उसकी अज्ञानता को दूर भगाने में, उसकी मुश्किलों को कम करने में सार्थक भूमिका निभाई है। विज्ञान मानव का निष्ठावान सेवक है। जीवन के हर क्षेत्र, चाहे वह हमारा घर हो या या कार्यस्थल, विज्ञान हमारा सहायक बनकर खड़ा है।

विज्ञान की मदद से इंसानों ने कई तरह की खोज करके अपने जीवन को और बेहतर बना लिया है। हर रोज हम ना जाने विज्ञान की मदद से बनाई गई कितनी तकनीकों और चीजों का इस्तेमाल करते हैं। नामुमकिन से लगने वाले कार्य मुमकिन हो रहें है। विज्ञान की मदद से हम अंतरिक्ष में पहुंचने में सफल हो गए हैं । विज्ञान से हमने रोबोट , कंप्यूटर जैसी चीजें बना ली हैं । विज्ञान हमारे जीवन में काफी महत्व रखता है ।

विश्व के लगभग सभी देशों ने विज्ञान में कुछ नया करने की कोशिश की है । भारत भी इससे अछूता नहीं है । वास्तव में पुरातन समय से ही भारत में वैज्ञानिक सोच से कई कार्य किए जाते रहे हैं।

परंतु अंधविश्वास और धर्मांधता ने इसे चमत्कार का रूप दे दिया और विज्ञान के वास्तविक अर्थ को भूलकर लोग वहम भ्रम का शिकार होते गए ।

किंतु फिर भी भारत में कई महान वैज्ञानिक हुए जिनमें सी वी रमन , डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा, सत्येंद्र नाथ बोस ,विक्रम साराभाई ,मेघनाथ साहा ,चंद्रशेखर, प्रफुल्ल चंद्र राय, डॉ हरगोबिंद खुराना और डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम आदि प्रमुख नाम है ।

प्रत्येक का विज्ञान के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान है और सभी ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है ।

इनमें से प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ चंद्रशेखर वेंकटरमन द्वारा भौतिक विज्ञान में प्रकाश और ध्वनि विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण खोज की । उन्होंने समुद्र के नीले रंग होने के कारणों की खोज शुरू की और 1925 में इस विषय पर आपकी खोज रमन प्रभाव के नाम से प्रसिद्ध हुई ।

यह खोज 28 फरवरी 1927 को पूर्ण हुई और इसी रमन प्रभाव के कारण 1930 में आपको भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला।

1986 से भारत सरकार ने डॉक्टर चंद्रशेखर वेंकटरमन के सम्मान में 28 फरवरी के दिन को ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस ‘ के तौर पर मनाने का फैसला किया। वेंकटरमन ने 1919 में बेंगलुरु में रमन अनुसंधान संस्थान की स्थापना की ।

1994 में आपको भारत रत्न से सम्मानित किया गया । विज्ञान दिवस के अवसर पर स्कूलों , कालेजों और विश्वविद्यालयों में विज्ञान मुकाबले करवाए जाते हैं ।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित व प्रेरित करना तथा जनसाधारण को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है।

इस दिन सभी विज्ञान संस्थानों, जैसे राष्ट्रीय एवं अन्य विज्ञान प्रयोगशालाएँ, विज्ञान अकादमियों, स्कूल और कॉलेज तथा प्रशिक्षण संस्थानों में विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों से संबंधित प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं।

महत्त्वपूर्ण आयोजनों में वैज्ञानिकों के लेक्चर, निबंध, लेखन, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, विज्ञान प्रदर्शनी, सेमिनार तथा संगोष्ठी इत्यादि सम्मिलित हैं।

विज्ञान की लोकप्रियता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय एवं दूसरे पुरस्कारों की घोषणा भी की जाती है।

विज्ञान की लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए विशेष पुरस्कार भी रखे गए हैं। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस देश में विज्ञान के निरंतर उन्नति का आह्वान करता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य कारण विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच को पैदा करना है।

यदि विद्यार्थी स्कूल समय से ही हर बात के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखेंगे तो समाज में फैले अंधविश्वास को रोका जा सकता है ।

आलोचक विज्ञान के बढ़ते प्रभाव को समाज और मानवता के लिए विनाशकारी भी मानते हैं वह अपनी बात के समर्थन में कई तर्क -वितर्क करते हैं और कहते हैं कि विज्ञान के कारण आज सारा संसार बारूद के ढेर पर बैठा है। सेहत को तथा नैतिकता को भी विज्ञान ने बिगाड़ा है । विज्ञान के कारण संसार में अनेको विषमताएं पैदा हो गई है।

विज्ञान ने आपसी प्रेमभाव और मेलजोल को घटा दिया है। परंतु यह सत्य नहीं है। यदि कुछ समस्याएं पैदा हुई है तो उसका कारण विज्ञान नहीं बल्कि मानव मन की विकृत सोच है।

मनुष्य अपने फायदे के लिए अच्छी से अच्छी वस्तु का गलत उपयोग करके उसको बुरा बना सकता है। उदाहरण के तौर पर परमाणु बिजली उत्पादन के लिए कितना फायदेमंद है परंतु उसको विस्फोट के रूप में प्रयोग करके हम ज्यादा खुशी प्राप्त करते हैं।अतः किसी समस्या के लिए विज्ञान को दोष देना उचित नहीं है।

इस आधुनिक दुनिया में एक देश के लिए दूसरे देशों से मजबूत और ताकतवर होने के लिए विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में नए अविष्कार करना बहुत आवश्यक है ।

आज मनुष्य ने विज्ञान और तकनीकी में बहुत विकास कर लिया है। अब तकनीकी के बिना रह पाना नामुमकिन हो गया है। इसने हमारे जीवन को सरल और आसान तथा सुविधाजनक बना दिया है। नए युग में विज्ञान के विकास ने हमें बैलगाड़ी की सवारी से हवाई यात्रा की सुविधा तक पहुंचा दिया है ।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण के हर पहलू को प्रत्येक राष्ट्र में लागू किया गया है । तकनीकी को चिकित्सा , शिक्षा , बुनियादी ढांचा, ऊर्जा निर्माण , सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में लागू किए बिना सभी लाभों को प्राप्त करना संभव नहीं था।

नवीन आविष्कारों ने हमें बहुत लाभ पहुंचाया है। मोबाइल फोन, टीवी , कंप्यूटर , इंटरनेट , ओवन फ्रिज , वाशिंग मशीन , पानी निकालने वाली मोटर, मोटरसाइकिल, ट्रेन , बस सभी कुछ तकनीकी की सहायता से संभव हो सका है। नई तरह की दवाइयां , चिकित्सा उपकरणों की सहायता से अब जटिल रोगों का इलाज संभव हो गया है ।

हमने अपने दैनिक जीवन में जो कुछ भी सुधार देखे हैं वह सब केवल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास के कारण है । देश के उचित विकास और वृद्धि के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ साथ चलना बहुत आवश्यक है। मानवता के भले के लिए और जीवन में सुधार के लिए हमेशा विज्ञान और प्रौद्योगिकी की मदद लेनी होगी ।

यदि हम तकनीकों की मदद नहीं लेते तो हम भविष्य में कभी भी आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होंगे और हमेशा पिछड़े हुए ही रहेंगे । यहां तक कि इसके बिना आज के इस प्रतियोगी और तकनीकी संसार में जीवित भी नहीं रह सकते हैं। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि विज्ञान का नकारात्मक प्रयोग करने की बजाय हम इसे सकारात्मक रूप में प्रयोग करें और समाज तथा मानवता के लिए इसे वरदान साबित करें यही हमारा कर्तव्य है।

By Deepak Sharma Science Subject Expert Zila Shiksha Sudhaar Team, Ferozepur

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Harish Monga

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