बाजरे की खरीद में आ रही खामियों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन 

नारनौल उपायुक्त निवास के बाहर प्रदर्शन करते राव अर्जुन सिंह समर्थक।
बाजरे बचने के लिए किसानों को जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा हैं: अर्जुन सिंह 
बी.एल. वर्मा द्वारा
नारनौल 10 अक्टूबर 2018 : हरियाणा कांग्रेस कमेटी के सदस्य व पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री राव बिरेन्द्र सिंह के सुपौत्र राव अर्जुन सिंह ने बुधवार को स्थानीय चितवन वाटिका में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं व किसानों की एक बैठक ली। इसके पश्चात सभी कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए उपायुक्त निवास पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों को बाजरे की खरीद में आ रही परेशानियों को लेकर उपायुक्त की अनुपस्थित में प्रशासनिक अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा।
इससे पूर्व चितवन वाटिका में कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए राव अर्जुन सिंह ने कहा कि सरकार ने बाजरे का सरकारी मूल्य 1950 रुपए रखा है, लेकिन मंडी में बाजरे को बेचने के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं से किसानों को गुजारना पड़ता है यह प्रक्रिया इतनी जटिल है कि सभी किसान भाई अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाए है, जिसके कारण मंडियों में उनके बाजरे की बिक्री पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। सरकार को चाहिए कि जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है उनका बाजरा भी मंडियों में खरीदा जाए। सरकार के मुताबिक 3.40.910  हेक्टेयर भूमि पर  6.20.699 मीट्रिक टन बाजरा होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार ने 1950 रुपए में बाजरा खरीद करने की बात कहीं है, लेकिन केवल एक लाख मीट्रिक टन की खरीद इस भाव में की जाएगी बाकी लगभग 5 लाख मीट्रिक टन बाजरा 1500 प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा जाएगा जो कि किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा है। असमय हुई बारिश के कारण कपास की फसलों में बहुत नुकसान हुआ है। सरकार द्वारा जिन बीमा कंपनियों को किसानों की फसलों का बीमा करने के लिए अधिकृत किया गया था तथा जबरन किसानों के खातों से बीमा की किस्त काटी गई थी। उन कंपनियों से फसल में हुए नुकसान की भरपाई सरकार करवाएं और किसानों को आर्थिक मार से बचाएं। सरसों का बीज जो पिछले वर्ष 630 रुपए प्रति किलो था अब 700 रुपए प्रति किलो हो गया है। अब सरसों की फसल बिजाई का कार्य किसानों ने शुरू कर दिया है तो यह बीज 70 रुपए बढ़ाकर उन पर दोहरी मार करने का काम सरकार कर रही है। पैट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते हुए दामों से महंगाई बढ़ गई है। कृषि संयंत्र डीजल पर आधारित है, डीजल के दाम बढऩे से कृषि करना भी महंगा हो गया है। डीएपी और यूरिया के दाम हर रोज बढ़ाए जा रहे हैं। डीएपी खाद का कट्टा जो 1250 रुपए में मिलता था पिछले 2 महीने में उसे बढ़ाकर 1450 रुपए कर दिया गया है। जिंक का कट्टा जो 250 में मिलता था अब 400 रुपए में मिलता है। किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। किसान धरती से अन्न पैदा कर पूरे देश का पेट भरता है। लेकिन यह सरकार उन किसानों पर लाठियां बरसाती है। किसानों की मांगों को ठुकराया जाता है और पूंजीपतियों के कर्ज माफ किए जाते हैं। किसानों पर सरकार दोहरी मार कर रही है। अपने वादे के अनुरूप सरकार को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करना चाहिए और किसानों को लाभ देना चाहिए, लेकिन यह सरकार केवल पूंजीपतियों उद्योगपतियों को लाभ पहुंचा रही है और किसानों पर मारकर रही है किसान, व्यापारी, कर्मचारी सभी वर्ग इस सरकार के दोहरे मापदंडों की वजह से व्यथित है दुखी है इस सरकार ने चुनाव में वादा किया था कि प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी, लेकिन अभी तक महेंद्रगढ़ जिले में कॉलेज की स्थापना करना तो दूर स्थान भी चिन्हित नहीं किया गया है जो इस सरकार की दक्षिण हरियाणा के प्रति उदासीनता को जाहिर करता है। यह सरकार भेदभाव करती है, जातिवाद करती है, क्षेत्रवाद करती है इस सरकार को हरियाणा की जनता उखाड़ फेंकने के लिए तैयार बैठी है।
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