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बिना जल के जल महल बना सूखा तालाब 

पानी नहीं होने से जलमहल की शोभा पर लगने लगा ग्रहण
त्रिभुवन वर्मा/ सुरेंद्र व्यास द्वारा  
नारनौल 9 मार्च 2019 : शहर का पुरातत्व स्मारक जलमहल आजकल पानी के अभाव में सूख गया है। बिना जल के जलमहल पर्यटकों को लुभाने में कामयाब नहीं हो रहा है। शहर के पुरानी मंडी के पास स्थित इस जलमहल की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि सदियों पुरानी है। गत वर्षों से इस जलमहल में अनेक बार नहरी पानी डाला गया, लेकिन कुछ महीनों के बाद यह सूख जाता है। अब गत लगभग डेढ़ महीने से जिसमें नहरी पानी नहीं आने से यह पूरी तरह से सूख गया है। सूखे जलमहल का दीदार करने वालों का अब टोटा पड़ गया है। इसके साथ ही यह बात भी गौरतलब है कि जब जलमहल में पानी भर दिया जाता है तो यहां आसपास के गांवों से, शहर के आम लोगों के साथ विदेशी पर्यटकों को जमघट लगा रहता है।
जल महल में पानी डालने के लिए बनाया गया था नाला:
इस जलमहल में पानी डालने के लिए लगभग 15 साल पूर्व एक नाला बनाया गया था। इस नाले में पानी पास की नहर से आता रहा है। जब भी किसानों को पानी की आवश्यकता कम होती है तो नहर विभाग इस नाले में पानी डाला जाता है। गत कुछ दिनों से रबी की फसलों की सिंचाई के लिए किसान नहरी पानी का ज्यादा उपयोग कर रहे थे। इसीलिए नहर विभाग ने इसमें पानी नहीं डाला। अब गत लगभग डेढ़ मास से इसमें पानी नहीं आने से यह सूख गया है।
आधुनिक सुविधाओं से सुशोभित है जलमहल:
एक समय था जब जलमहल के नाम पर यहां केवल खंडहर ही था। सन 1994 में तत्कालीन उपायुक्त आर.आर. फूलिया ने श्रमदान के माध्यम से इसकी छंटाई करवाई थी। बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सहमति से इसमें पानी डालने का काम शुरू किया गया। इसकी उपयोगिता को देखकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसके विकास की ओर ध्यान दिया तथा देखते ही देखते यहां हर प्रकार ही सुविधाएं उपलब्ध करवा दी गई। आजकल यहां वाईफाई, पार्क, शौचालय, स्ट्रीट लाईट तथा पुस्तकालय आदि की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
पानी के अभाव में नहीं हो रहा पर्यटकों का आवागमन:
जलमहल में पानी नहीं होने से इसकी शोभा काफी कम हो गई है। इसीलिए यहां पर आने वाले पर्यटकों का अकाल पड़ गया है। पहले जहां यहां प्रतिदिन लगभग 500 आम लोग व देशी व पर्यटक आते थे अब यहां कुछ गिने चुने स्थानीय लोग ही आते हैं। पानी के नहीं होने से विदेशी पर्यटक नहीं आते। यही कारण है कि बिना पानी के यहां सब कुछ सुनसान पड़ा है।
जल महल का महत्व दिनोंदिन इसलिए भी बढ़ता जा रही है, क्योंकि यहां पर आम दिन देश व विदेश के सैकड़ों पर्यटक आते रहते हैं। पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां के पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अलावा शहर के होटलों के मालिक भी इसमें योगदान देते रहते हैं। लेकिन जब भी इसमें पानी नहीं होता है तो यहां कोई भी आना पसंद नहीं करता। यही कारण है कि आम लोग तथा पर्यटकों से होने वाली आय का लाभ उठाने वाले समय-समय पर प्रशासन से इसमें पानी डालने का दबाव बनाते रहते हैं।
क्या कहना है पुरातत्व विभाग के अधिकारी का:
इस बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण प्रवीण कुमार का कहना है कि जलमहल में गत लगभग डेढ़ मास से पानी नहीं आया है, जिस कारण जलमहल सूख गया है। अब इसमें अगले मास तक जब भी नहर आएगी तो पानी आने की संभावना है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस जलमहल की देखरेख कर रहा है। विभाग की मदद से यहां हर तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। यहां पर विभाग द्वारा अन्य सुविधाएं भी जल्द ही मुहैया करवा दी जाएंगी, जिनमें कैंटीन, देश के विभिन्न स्मारकों की पुस्तकें तथा वाचनालय आदि शामिल हैं।