“भरतपुर लुट गयौ रात मोरी अम्मा”

"भरतपुर लुट गयौ रात मोरी अम्मा"
तुफ़ैल चतुर्वेदी :
नागरिकता संशोधन विधेयक जिसे अंग्रेज़ी में सिटिज़न एमेंडमेंट बिल यानी C.A.B. कहा जाता है, लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो गया। दोनों जगह देखने में आया कि सदनों में उपस्थित इस्लामी वर्ग, मातृभूमि के विभाजन के साथ ही इस्लामी वर्ग के वोटों के लिये लार टपकाता आ रहा राजनैतिक नेतृत्व इस बिल के ख़िलाफ़ हाय हाय करने पर तुला है। इसकी छान फटक करनी चाहिये कि इस पर इस्लामी नेतृत्व क्यों बिदक रहा है ?

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की हाय हाय तो समझ में आती है कि पाकिस्तान के अपने अल्पसंख्यकों के साथ किये अत्याचार, पाप सामने आ जाएंगे मगर बदरुद्दीन अजमल, जावेद अली, सोनिया माइनो एंटोनियो गाँधी, ग़ुलाम नबी आज़ाद, चिदम्बरम आदि क्यों उलझ उठे ? आख़िर इस बिल में देश के मुसलमानों के ख़िलाफ़ क्या वर्तमान भारत के नागरिकों को ले कर ही कुछ है नहीं, फिर ओवैसी की ओ-ऐसी क्यों हो रही है ? उसने संसद में C.A.B. की प्रति क्यों फाड़ी ? देवबन्द, सहारनपुर के मदरसों के लौंडे-लफाड़ी सड़कों पर क्यों उतर आये ?

इस प्रश्न का उत्तर, इसकी जड़ें 1947 के भारत विभाजन में हैं। ध्यान रखने योग्य बात है कि हिंदू, सिक्ख, बौद्ध, जैन, ईसाई यहूदी समाज के लोगों ने विभाजन नहीं माँगा था। इस्लाम ने पूज्य मातृभूमि के टुकड़े किये। बँगाल के गाँवों में हरिनाम संकीर्तन करते हुए, ध्यान करते हिंदू-बौद्ध किसान, गृहणियाँ, कर्मचारी, दुकानदार: सिंध के गाँवों में खेती, व्यापार करते हुए हिंदु-बौद्ध-सिक्ख तो 14 अगस्त 1947 को जानते ही नहीं थे कि गाँधी,-नेहरू की कांग्रेस, मुस्लिम लीग और अंग्रेज़ों ने उन्हें किस गहरी घाटी में धकेल दिया है। उनके भविष्य पर कैसी भयानक सियाही पोत दी है। उन्हें तो तब पता चला जब मुल्ला इस्लामियों की भीड़ें ले कर उनके पास पहुँचे  और उन्हें मुसलमान बनने को कहा।

उनके मुसलमान न बनने पर उनको भयानक यातनाएं दीं, उनके हाथ-पैर तोड़े, उनकी बहन-बेटियों के साथ बलात्कार किया। हिंदू-बौद्ध-सिक्ख सृष्टि के उषा काल से ही जिस धरती पर रह रहे थे, 14 अगस्त 1947 से उन से शत्रुता रखने वाली धरती बना दी गयी। असहाय, निरुपाय हिंदू-बौद्ध-सिक्ख समाज के लोगों के पास तीन ही रास्ते थे। मर जाएँ या हर प्रकार की यातनाएं सह कर पाकिस्तान, बंगलादेश में रहें या सदियों से उनके पूर्वजों से शत्रुता रखते आये, उनके मंदिर तोड़ते आये, उनकी माता-बहनों के साथ बलात्कार करते आये, उनकी स्त्रियों को लौंडी बना कर बेचते आये इस्लाम को स्वीकार करें अथवा कल तक उसका भारत रहे मगर अब नोच-तोड़ कर वर्तमान बचे भारत में शरण लें ।

यह भारत का दायित्व भी था मगर वस्तुस्थिति क्या थी, इस पर चर्चा करने से पहले यह जानना आवश्यक है कि विभाजन के समय देश से छीने गए भागों की डैमोग्राफ़ी क्या थी ? पश्चिमी पाकिस्तान में 12.9% हिंदू, बौद्ध थे जो अब 1.6% बचे हैं। तब पूर्वी पाकिस्तान में 22.5% थे जो बाँग्लादेश बन चुका है और अब वहां 8.5% हिंदू, बौद्ध बचे हैं। इन पर 1947 से ही भयानक अत्याचार होते रहे हैं। इन पर मुसलमान बनने के लिये दबाव डाला जाता रहा है। हिंदू, बौद्ध अपनी दुकानें, धरती छोड़ कर, लुट-पिट कर भी चोरी-छिपे भारत आते रहे हैं। विपन्न बन कर भारत आये हिंदुओं के साथ क्या होता रहा है, यह भी जानना चाहिये।

पश्चिमी बंगाल के सुंदर वन डेल्टा में मारीच झपी द्वीप है। 1979 में उस पर 40,000 बांग्लादेशी शरणार्थी एकत्र हो गये। इस विषय की विस्तृत चर्चा पुस्तक Blood Island लेखक दीप हलदर में है। वामपंथी सरकार द्वारा वहाँ 26 जनवरी को धारा 144 की घोषणा की गयी। जिस धरती पर लुट-पिट कर असहाय, निरुपाय हिंदु, बौद्ध आये हैं वहाँ कैसे वापस जाते ? 31 जनवरी को वामपंथी कैडर के साथ पश्चिम बँगाल की पुलिस ने उन पर आक्रमण किया। सैकड़ों लोगों की हत्यायें हुईं। उनकी लाशें समुद्र में भा दी गयीं। वह भारत जिसकी परम्परा शीश दे कर भी शरण आये व्यक्ति की हर प्रकार से रक्षा करने की रही है, वहाँ अपने ही भाइयों के साथ यह व्यवहार हुआ है और इसका कारण इस्लामी वोटों का दबाव ही है।

विचारणीय है कि भारत का विभाजन इस्लाम ने किस कारण किया ? जिन क्षेत्रों में पाकिस्तान बना वो सब तो पहले से ही इस्लामी वर्चस्व के क्षेत्र थे तो फिर पाकिस्तान बनने से किस समस्या का समाधान होना था ? जिन क्षेत्रों को पाकिस्तान बनना था, वहाँ के ही नहीं बल्कि वहाँ से बाहर के क्षेत्रों में इस्लामियों में पाकिस्तान के पक्ष में ज़बरदस्त हिलोर थी। देश के विभाजन से पहले सम्पूर्ण भारत के मुस्लिम निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम लीग को बढ़त मिली तो क्यों ? इस प्रश्न के उत्तर के लिये व्यंकट धूलिपाला की पुस्तक Making Of A New Madina पढ़नी चाहिये। मुहम्मद जी को मक्का से भागना पड़ा था और मक्का से मुहम्मद जी ने मदीना में शरण ली। वहाँ की सत्ता हस्तगत की और मदीना से फिर मक्का पर विजय प्राप्त की। मक्का के मंदिर की 360 मूर्तियां नष्ट कीं और उसे अपने प्रचार का केंद्र बनाया।

यही सोच पाकिस्तान बनाने की पीछे थी और इस्लामियों ने भारत के टुकड़े कर भारत के दोनों छोर पर मदीना स्थापित किया। जहाँ से हर प्रकार का वैचारिक, सैनिक, जनसंख्यात्मक आक्रमण करने का आधार बनाया गया। उसमें सफलता भी मिली और अगले चरण में कश्मीर घाटी को हिन्दुविहीन कर दिया गया। भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान के पूर्वी-पश्चिमी दोनों हिस्सों में रह गए हिंदू तो आसान शिकार थे ही और उनको हर प्रकार से डरा-धमका कर, मार-पीट कर, लड़कियां उठा कर इस्लामी बनाया गया। भारत के असम, बँगाल, बिहार, पँजाब, गुजरात, तमिलनाडु, कर्णाटक आदि क्षेत्रों में जनसंख्यात्मक आक्रमण चल ही रहा है।

अचानक मोदी, शाह के नेतृत्व में भाजपा ने बड़े पैमाने पर जनसंख्यात्मक आक्रमण में बदलाव कर दिया। एक अनुमान के अनुसार भारत में 2 करोड़ के आसपास पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से आये, छुप कर रह रहे विस्थापित हिन्दू, बौद्ध, सिक्ख, जैन, ईसाई, पारसी हैं। उनको भारत की नागरिकता मिलने का अर्थ है भाजपा के पक्ष में 2 करोड़ वोट बढ़ जाना। इस्लाम सदैव से दीन और दौला को संयुक्त मानता है। दीन अर्थात मज़हब और दौला अर्थात राजनीति। मोदी, शाह के नेतृत्व में भाजपा ने बहुत स्मार्ट चल चल कर दौला की खाट खड़ी कर दी। 2024 के चुनाव में 2 करोड़ पक्के वोट भाजपा ने बढ़ा लिये।

इस चिंतन के मकौड़े की पहली टाँग तीन तलाक़ बिल से तोड़ी गयी। दूसरी टाँग धरा 370, 35A हटा कर तोड़ी गयी अब तीसरी टाँग नागरिकता संशोधन विधेयक C.A.B. ला कर तोड़ दी गयी। ग़ज़वा-ए-हिन्द का सपना देखने वाली आँखें इसी लिये बिलख रही हैं। इसी कारण इस्लामी दौला और देश विभाजन से उसका साथ देते आये कोंग्रेसी बिलबिला रहे हैं।

चलिये मिल कर ज़ोर-ज़ोर से कोरस गाते हैं “भरतपुर लुट गयौ रात मोरी अम्मा”

तुफ़ैल चतुर्वेदी  tufailchaturvedi@gmail.com

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