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भारत संस्कृति यात्रा कार्यक्रम में दिखी कत्थक व ओड़िसी नृत्य की झलक, कलाकारों ने बटौरी तालियां

ओड़िसी नृत्य में दिखाए दशावतार, गुरु डा. गजेंद्र पाण्डा के नृत्य ने मनवाया लोहा

दो दिवसीय भारत संस्कृति यात्रा का हुआ भव्य आगाज, अंतर्राष्टीय कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा

कुरुक्षेत्र 23-08-2019 (  गौतम देव शर्मा   ) :                     भारत प्रतिभाओं का देश है। समूचे भारतवर्ष में प्रत्येक शहर, गांव तथा कस्बे में ऐसे उम्दा कलाकार देखने को मिलते है जो अपनी प्रतिभा के दम पर सभी को दांतो तले उंगलियां दबाने को मजबूर कर देते हैं। ऐसे ही कलाकारों का समूह भारत संस्कृति यात्रा

​फाइल फोटो ​:

कार्यक्रम के दौरान मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर पहुंचा और अपनी प्रतिभा से शहरवासियों को आनंदित किया। गौरतलब है कि हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर अम्बाला मण्डल द्वारा समय समय पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है। जिसमें हरियाणा प्रदेश के अतिरिक्त अन्य प्रदेशों के कलाकारों की प्रतिभा का दर्शन कुरुक्षेत्रवासियों को करने का अवसर मिलता है। गत दिनों से निरंतर आयोजित हो रहे कार्यक्रमों से न केवल आमजनमानस का मनोरंजन हो रहा है, अपितु सभी को संस्कृति के विभिन्न आयामों को जानने का अवसर भी मिल रहा है। इसी कड़ी में जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में मैक की भरतमुनि रंगशाला में दो दिवसीय भारत संस्कृति यात्रा का आयोजन किया गया। जिसमें कलकता की हिंदुस्तान आर्ट एण्ड कल्चरल सोसायटी के सहयोग से अंर्तराष्टीय ख्याति प्राप्त कलाकार कुरुक्षेत्र पहुंचे। भारत संस्कृति यात्रा के पहले दिन कत्थक तथा ओड़िसी नृत्यों की प्रस्तुतियां रही। इस मौके पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की नृत्य एवं संगीत विभागाध्यक्षा व डीन इंडिक स्टडिस शुचिस्मिता शर्मा बतौर मुख्यअतिथि उपस्थित रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम से पूर्व ओपन माईक में दर्शकों में से जगपाल तथा दर्शन ने हरियाणवी गीत व रागनियों के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया। वहीं मैक के आर्टिस्ट कोर्डिनेटर हरमोहन कुमार ने भी पुराने नगमें सुनाकर सभी का दिल जीता। मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति कत्थक नृत्य की रही। जिसमें कोलकाता से अंतर्राष्टीय ख्याति प्राप्त कलाकार सुष्मिता चटर्जी ने अपनी प्रतिभा को दिखाया। प्रस्तुति से पूर्व कत्थक के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि कत्थक का सम्बध कथा से है। जिसमें विभिन्न प्रसंगों को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। सुष्मिता चटर्जी ने शुद्ध कत्थक, तराना प्रस्तुत किया। वहीं गजल की प्रस्तुति से भरपूर वाहवाही लूटी। इसके अलावा उड़ीसा से आए कलाकार गुरु डा. गजेद्र पाण्डा ने ओड़िसी नृत्य के माध्यम से दशावतार वर्णन किया। लगभग 65 देशों में अपनी संस्कृति का परचम लहरा चुके डा. पाण्डा व साथी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जा रही प्रस्तुति में दर्शक जमकर तालियों से वाहवाही दे रहे थे। इसके बाद डा. शुभ्रा अरोड़ा व श्रीपर्णा चक्रवर्ती ने युगल कत्थक प्रस्तुत कर लोगों का दिल जीता। शुद्ध कत्थक, सुरदास पद, कृष्ण स्तुति के साथ सावन नृत्य प्रस्तुत कर दोनों कलाकारों ने कार्यक्रम में खूब रंग जमाया। वहीं सात वर्षीय रुत अरोड़ा ने सुर ताल तराना के साथ कत्थक की ऐसी दमदार प्रस्तुति दी कि दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से खूब सराहना दी। अंत में शुचिस्मिता शर्मा ने सभी को सम्बोंधित करते हुए कहा कि सभी नृत्यों का मूल शास्त्रीय नृत्य हैं। नृत्य साधना में कलाकार अपनी प्रतिभा में निखार लाते हुए जहंा एक ओर भारतीय संस्कृति को जन जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं वहीं देश को सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध बना रहे हैं। वहीं नागेंद्र शर्मा ने धन्यवाद करते हुए कहा मैक का उद्देश्य कला व संस्कृति को विस्तार देना है ताकि युवा पीढ़ी आधुनिकता के समय में पाश्चात्य संस्कृति को भूलकर भारतीय संस्कृति का अनुकरण करे। वहीं उन्होंने हिंदुस्तान आर्ट एण्ड कल्चरल सोसायटी का भी धन्यवाद किया, जिनके सहयोग से भारत संस्कृति यात्रा का आयोजन किया जाना सम्भव हो पाया। अंत में सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।