मकर संक्रांति पर दान का खास महत्व

मकर संक्रांति पर दान का खास महत्व बाजारों में खरीददारी के लिए लगी लोगों की भीड़
नारनौल,13 जनवरी ,2020 : लोहड़ी व मकर संक्रांंति का पर्व नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। लोग बाजारों में मूंगफली, रेवड़ी, गजक, गुड़, तिल, घी, मेवा आदि समेत कपड़े व कॉस्मेटिक के सामान की जमकर खरीददारी कर रहे है। वहीं इन सामानों पर महंगाई की मार भी देखने को मिल रही है। इन सामानों में पिछले वर्ष की तुलना में महंगाई बढ़ गई है।मूंगफली, गजक ,रेवडी, चीनी व गुड की गजक दुकानों पर बिक्री कर रहे है। महावीर चौक पर दुकानदार सुभाष चंद सैनी, राम गोपाल, बाबूलाल, लालचंद, रोहताश व महेन्द्र कुमार ने बताया कि मूंगफली 80 रुपए, रेवडी 100 रुपए, गजक 120 रुपए चीनी की गजक 100 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से बिक्री कर रहे है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को रहेगा। जानकार बताते है कि मकर संक्रांति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर आते हैं और इसके बाद खरमास समाप्त होता है। बता दें कि खरमास में कोई भी मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं, लेकिन इनके खत्म होते ही तमाम शुभ काम का योग शुरू होता है।
दान का खास महत्व:
मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान का बहुत महत्व है। कहते हैं कि इस मौके पर किया गया दान सौ गुना होकर वापस फलीभूत होता है। मकर संक्रांति के दिन घी-तिल-कंबल-गर्म वस्त्र, खिचड़ी दान का खास महत्व है। हालांकि इस दिन राशि के अनुसार दान करने की महिमा ज्यादा बताई गई है। दरअसल, संक्रांति में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का असर हर राशि पर अलग होता है, इसलिए ऐसा माना जाता है।
इस प्रकार मनाते है त्यौहार:
लोहड़ी व मकर संक्रांति का त्यौहार खास तौर पर राजस्थान, पंजाब व हरियाणा में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। राजस्थान में इस दिन जमकर पतंगबाजी भी की जाती है। वहीं पंजाबी समुदाय के लोगों द्वारा लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन विशेष तौर पर उस घर में लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है जहां कन्या ने जन्म लिया हो और उसकी प्रथम लोहड़ी हो। लोहड़ी पर्व पर लोग खुली जगह में भारी संख्या में एकत्रित होकर आग जलाकर व मुंगफली, रेवड़ी आदि बांटकर इस त्यौहार को मनाते है। यह त्यौहार प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और खेती से जुड़ा है। इन्हीं तीन चीजों को जीवन का आधार भी माना जाता है।
रातें छोटी, दिन बड़ा:
मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरी गोलाद्र्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। इसलिए इस दिन से रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से सूर्य की रोशनी अधिक होगी और रात छोटी होने से अंधकार कम होगा। इसलिए मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है।

बी.एल. वर्मा द्वारा :

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