मछली पालन का धंधा अपना कर अच्छा लाभ ले रहा है गाँव दुल्लवा का सफल किसान हरदीप सिंह

 

कैप्शन: फतेहगढ़ साहिब ज़िला के गाँव दुल्लवा का सफल मछली पालक हरदीप सिंह अपने मछली तलाब  में मछली को फ़ीड डालते हुए।

·         सफल किसान अपनी छह एकड़ ज़मीन में से ढाई एकड़ क्षेत्रफल में कर रहा है मछली पालन का धन्दा

·         रवायती खेती की अपेक्षा मछली पालन के धंधे से दो से तीन गुणों अधिक होती है आमदन

·         मछली तालाब के पानी को अपने खेतों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल करके कर रहा है धरती निचले पानी की बच्चत

·         सफल  किसान हरदीप सिंह ने दूसरे किसानों को दिया सहायक धंधे अपनाने का न्योता

सुरेंद्र व्यास द्वारा 

फतेहगढ़ साहिब , 22 नवंबर:​​आज जब कि खेती लागतें बढ़ने के कारण रवायती कृषि किसानों के लिए लाभपरक नहीं रही तो उस समय सहायक धंधे ही एक मात्र ऐसा साधन हैं जिन को अपना कर किसान अपनी आर्थिकता को मज़बूत कर सकते हैं। मछली पालन का सहायक धंधा रवायती कृषि का सही बदल साबित हो रहा है और फतेहगढ़ साहिब  ज़िले  के कई किसान मछली पालन के धंधे को सहायक धंधे के तौर पर अपना कर अच्छा लाभ ले रहे हैं। ऐसा ही एक सफल मछली पालक फतेहगढ़ साहिब ज़िले  के गाँव दुल्लवां का किसान हरदीप सिंह पुत्र बलदेव सिंह हैजो कि मच्छीपालण के धंधे को अपना कर रवायती खेती की अपेक्षा दोगुना लाभ प्राप्त कर रहा है।

यहाँ यह वर्णनयोग्य है कि सफल मछली पालक हरदीप सिंह ने साल 1993 में खेड़ी नौध सिंह के सरकारी स्कूल से बारहवीं  पास की हुई है। इस किसान के पास अपनी छह एकड़ ज़मीन है जिस में से ढाई एकड़ ज़मीन में वह सफलता से मछली पालन का धंधा कर रहा है। प्रगतिशील किसान हरदीप सिंह ने बताया कि उस ने मछली पालन विभाग की तरफ से मछली पालन सम्बन्धित दिया जाता  5दिनों की प्रशिक्षण भी हासिल किया हैं  और साल 1998 में उस ने मछली पालन का काम शुरू किया। इस किसान ने साल 2016 में ढाई एकड़ ज़मीन में मछली तालाब बना कर मछली पालन का धंधा शुरू किया। जिस से इस को अच्छा लाभ हो रहा है। यह मछली पालक हर 2 महीनो में 70 से 80 रुपए प्रति किलो के हिसाब के साथ मछली बेचता है और उसी समय मछली की खरीद का नगद पैसा वसूल करता है। इस के इलावा यह सफल किसान मछली के तालाब का पानी अपने खेतों में सिंचाई के लिए ईस्तेमाल करता है जिस के साथ ज़मीन  निचले पानी की बचत होती है।

सफल मछली पालक हरदीप सिंह ने कहा कि मछली पालन का धंधा रवायती खेती का  सही बदल है और इस धंधो में कम मेहनत करके ज़्यादा लाभ लिया जा सकता है। इस के इलावा कुदरती आफतों जैसे कि बारिश – आँधी या तूफान के साथ होने वाले नुक्सान का ख़तरा भी नहीं रहता और लाभ भी दोगुना होता है। हरदीप सिंह का कहना है कि मछली पालन के धन्दे  ने उसकी आर्थिकता को मज़बूत करने  में बड़ा योगदान डाला  है। उस ने ज़िलो के दूसरे किसानों को न्योता दिया कि वह रवायती खेती को छोड़ कर सहायक धंधे अपनाने को प्रथमता दें जिस के साथ उन को कर्ज़े लेने की ज़रूरत नहीं रहेगी और वह आर्थिक पक्ष से भी वह काफ़ी मज़बूत होंगे क्योंकि मछली पालन के धंधो के साथ रवायती खेती की अपेक्षा प्रति एकड़2 से 3 गुणा अधिक आमदन हासिल की जा सकती है।

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