महिलाएं किसी भी मोर्चे पर पुरुषों से पीछे नहीं, कुहाड़

महिलाएं किसी भी मोर्चे पर पुरुषों से पीछे नहीं, कुहाड़

सुरेंद्र व्यास :

महेंद्रगढ़  /  जालंधर २३ मई २०२० :         महिलाएं किसी भी मोर्चे पर पुरुषों से पीछे नहीं हैं, बस जरूरत है भरपूर अवसर उपलब्ध कराने की। भारत इस मामले में तेजी से प्रगति कर रहा है और सरकार की ओर मिल रहा सहयोग महिलाओं को आगे आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह विचार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो.आर.सी.कुहाड़ ने शनिवार को ‘वीमेन इन स्टेम‘ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय नई दिल्ली – जालंधर २३ मई २०२० :  को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एजुकेशन द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में मुख्य अतिथि प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग व मैथमेटिक्स (स्टेम) में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई भी क्षेत्र किसी भी जेंडर विशेष के लिए निर्धारित नहीं है और जहाँ तक बात महिलाओं की है तो महिलाओं ने हर बार, हर मोर्चे पर साबित किया है कि वो किसी भी स्तर पर पुरुषों से कमतर नहीं हैं। प्रो.कुहाड़ ने कहा कि एक महिला शिक्षित होती है तो एक परिवार, एक समाज और एक देश शिक्षित होता है। भारत की बात करें तो आज महिलाएं विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स, शिक्षा, चिकित्सा, सेना, रेलवे आदि क्षेत्रों में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं। कुलपति ने कहा कि महिलाएं सदैव सृजनात्मक, उदार और सहयोगी होती हैं और उनकी यही खूबियां देश, समाज व मानव कल्याण में सहयोगी साबित होती है। आज बस जरूरत है कि महिलाओं को आगे लाया जाए और इस दिशा में मिलकर प्रयास किये जायें। प्रो. कुहाड़ ने कहा कि इस वेबिनार में माध्यम से प्राप्त होने वाले सुझावों को हम उचित मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।

वेबिनार में विशेषज्ञ वक्ता डॉ.रेचल शैफ्फील्ड, स्कूल ऑफ एजुकेशन, कर्टिन यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया ने स्टेम के क्षेत्र महिलाओं की उपस्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि इसका संबंध केवल पुरुषों से नहीं है और महिलाएं भी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसा देखने में आता है कि महिलाएं स्कूल लेवल या फिर पोस्ट ग्रेजुएशन के स्तर पर आकर स्टेम एजुकेशन से किनारा कर लेती है। हमें इस विषय पर विशेष रूप से प्रयास करने होंगे। इसी तरह डॉ. रेखा भान कौल, डीन इंटरनेशनल, कर्टिन यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया ने इस विषय के पीछे के सामाजिक कारणों और मानसिक सोच पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलाव शुरुआत से ही करना होगा। कोई भी क्षेत्र महिला-पुरुष के आधार पर परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए। जहां तक बात स्टेम की है तो आज इन क्षेत्र में 74 फीसद पुरुष है जबकि 26 फीसद महिलाएं है। हमें इस मोर्चे पर बदलाव की कोशिश करनी होगी। डॉ. रेखा ने कहा कि इस सोच में बदलाव प्रारंभिक स्टार पर लाना होगा तभी स्थिति में बदलाव सम्भव है। उन्होंने लिंगानुपात  के मामले में हरियाणा राज्य के प्रयासों की सराहना की। इस वेबिनार में शामिल शिक्षकों, विद्यार्थियों व शोधार्थियों ने सवाल -जवाव के सत्र में इस विषय से सम्बन्धित अपनी जिज्ञासा भी विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत की उनका पक्ष जाना।इस वेबिनार के अंत में प्रो.सारिका शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। वेबिनार की रूपरेखा स्कूल ऑफ एजुकेशन के डीन डॉ. प्रमोद कुमार ने प्रस्तुत की और संचालन का कार्य डॉ.रेणु यादव ने किया। डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि इस वेबिनार के लिए हमें 2000 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए। इस आयोजन में देश-विदेश से प्रोफेसर, शोधार्थी, विद्यार्थी शामिल हुए। डॉ. प्रमोद ने कहा कि इस वेबिनार के माध्यम से महिलाओं के लिए स्टेम एजुकेशन की दिशा में शुरू हुए प्रयास को हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय आगे भी बढ़ाएगा।

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