Haryana

राजस्थान के भवन निर्माण मजदूर एमपी नगर में खाली पड़ी जमीन पर बसे, लोग परेशान

राजस्थान के भवन निर्माण मजदूर एमपी नगर में खाली पड़ी जमीन पर बसे, लोग परेशान

राजस्थान के भवन निर्माण मजदूर एमपी नगर में खाली पड़ी जमीन पर बसे, लोग परेशान

नारनौल गौशाला के पीछे बसी झुग्गी-झोपडिय़ों का दृश्य।

कालेज व स्कूल के विद्यार्थियों व स्टाफ  दूषित वातावरण में रहना हुआ मुश्किल
बी.एल. वर्मा द्वारा :
नारनौल,16 नवंबर,2019:  अब तक स्थानीय हुडा कालोनी सेक्टर एक के फेज वन तथा लघु सचिवालय के साथ लगती जमीन पर लंबे समय से रह रहे राजस्थान के भवन निर्माण मजदूर अब एमपी नगर में खाली पड़ी जमीन पर आ बसे हैं। जमीन के मालिक ने उन्हें झुग्गी-झोंपडिय़ों के लिए किराए पर जमीन उपलब्ध करवाकर मजदूरों की पूरी बस्ती वहां बसा दी है। ये लोग कहने को ही मजदूर हैं। हकीकत में ये भवन निर्माण का कार्य ठेके पर करते हैं तथा इनके पास भवन निर्माण से संबंधित सभी मशीनें व ट्रैक्टर आदि भी सुलभ हैं।
स्थानीय पुलिस लाइन व गोपाल गौशाला के पीछे बसी इस बस्ती में काफी संख्या में भवन निर्माण का काम करने वाले रह रहे हैं। इस बस्ती वजह से आसपास में चल रहे पुलिस लाइन में चल रहे पुलिस पब्लिक डीएवी स्कूल व स्टाफ  के बच्चों के साथ-साथ सरकारी कॉलेज व बचपन शाला स्कूल के विद्यार्थियों व स्टाफ  आदि का भी दूषित वातावरण में रहना मुश्किल हो गया है। मोहल्ला आदर्श नगर, एमपी नगर तथा कैलाश नगर के बीच पड़ी खाली कृषि जमीन का उपयोग इनके द्वारा खुले में शौच जाने के लिए किया जा रहा है। साथ ही बस्ती के लोग कूड़ा-करकट भी खुले मे डालने के अलावा प्रतिदिन जला भी रहे हैं। जिसकी वजह से इन कालोनी के निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजदूर बस्ती के बसने के बाद से ही यहां पर्यावरण में धुएं की भरमार रहने के साथ ही खुले में पड़े शौच के कीटाणु भी वातावरण में तैरते रहते हैं। जिसकी वजह से सैकड़ों की संख्या में सुअरों ने भी यहां स्थाई आवास बना लिया है। भारी संख्या में यहां रह रहे ये सुअर कॉलोनी के लोगों के घरों के सामने बनी नालियों का क्षतिग्रस्त करने के साथ ही बस्ती के साथ लगती कृषि भूमि में खड़ी गेहूं आदि की फसल को भी चौपट कर रहे हैं। इस मजदूर बस्ती के साथ बने भवनों में रह रहे कालोनी के लोग जब जमीन मालिकों से इन मजदूरों को यहां बसाने पर ऐतराज जताते हैं तो उनका एक ही जवाब होता है कि जमीन उनकी अपनी है और वे जिसे चाहेए उसे यहां बसाएंगे। बस्ती के साथ बने मकानों में रह रहे लोगों ने बताया कि इन मजदूरों द्वारा खुले में शौच करने की वजह से यहां पर्यावरण दूषित हो रहा है, वहीं सैकड़ों सुअरों ने भी यहां स्थाई रूप से निवास बना लिया है। ये सुअर उनके घरों के आसपास बनी पानी की निकासी की नालियों को तहस-नहस करने के साथ ही पूरी जमीन की खुदाई करते रहते हैं। जिसकी वजह से उन्होंने अपने बच्चों को लेकर भी भय बना रहता है। क्योंकि सुअरों को भगाने के लिए जब महिलाएं व बच्चे जब उनका पीछा करते हैं तो उलटा उन्हें ही डराने लगते हैं।
बस्ती के साथ लगती कृषि भूमि में फसलें पैदा कर रहे रोहतास यादव, हरिमोहन, सुरेश, किशन, जितेंद्र आदि ने बताया कि उन्होंने हजारों रुपये की लागत लगाकर हर वर्ष की भांति इस बार भी अपनी जमीन में गेहूं की बिजाई है। अबसे पहले उनकी खेती में पशुओं द्वारा कोई नुकसान नहीं किया गया था। मगर इस मजदूर बस्ती के बसने के बाद से यहां रह रहे सुअरों ने उनकी फसल को चौपट कर दिया है। जिसके लिए किसी के समक्ष गुहार लगाने में भी समर्थ नहीं हो पा रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सरकार के स्वच्छता अभियान व खुले में शौच मुक्त अभियान को पलीता लगा रहे लोगों को यहां से उठाया जाए, क्योंकि मजदूरों की यह बस्ती सघन आबादी के बीच बनाई गई है, जिसकी वजह से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।