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श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर गौड़ ब्राह्मण सभा नारनौल द्वारा श्रावणी महोत्सव व पूजा का आयोजन आज

श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर गौड़ ब्राह्मण सभा नारनौल द्वारा श्रावणी महोत्सव व पूजा का आयोजन आज

-शिव कुंड में विश्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर गौड़ ब्राह्मण सभा नारनौल द्वारा श्रावणी महोत्सव व पूजा का आयोजन आज  धि-विधान से स्नान उपरांत यगोपवित परिवर्तन तथा नए ब्राह्मण कुमारों को यज्ञोपवीत धारण करवाया जाएगा-राकेश महता
त्रिभुवन वर्मा द्वारा :
नारनौल14अगस्त 2019 :  गुरुवार को श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर गौड़ ब्राह्मण सभा नारनौल द्वारा श्रावणी महोत्सव व पूजा का आयोजन किया जाएगा। उक्त आशय की जानकारी बुधवार को गौड ब्राह्मण सभा नारनौल के प्रधान राकेश महता ने दी। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। इस बार इस कार्यक्रम को क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं धार्मिक रूप से विख्यात महर्षि चमन ऋर्षि की तपस्वी प्रसिद्धि ढ़ोसी पहाड़ी के शिव कुंड पर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पावन अवसर पर गौड़ ब्राह्मण सभा नारनौल द्वारा आयोजित कार्यक्रम शिव कुंड पर प्रात-8-00 बजे आचार्य देवदत्त शास्त्री पूर्व प्रधान के सानिध्य में होगा।

श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर गौड़ ब्राह्मण सभा नारनौल द्वारा श्रावणी महोत्सव व पूजा का आयोजन आज

श्री महता ने बताया कि इस दिन शिव कुंड में विधि-विधान से स्नान उपरांत यगोपवित परिवर्तन तथा नए ब्राह्मण कुमारों को यज्ञोपवीत धारण करवाया जाएगा। इसके बाद प्रसाद वितरण होगा।

श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर गौड़ ब्राह्मण सभा नारनौल द्वारा श्रावणी महोत्सव व पूजा का आयोजन आज  उन्होंने कहा कि श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर गौड़ ब्राह्मण सभा नारनौल द्वारा श्रावणी महोत्सव व पूजा का आयोजन आज  श्रावण मास की पूर्णिमा एक बहुत ही शुभ एवं पवित्र दिन माना गया है हिंदू धर्म शास्त्रों एवं ग्रंथों के अनुसार इस दिन किए गए तप और दान का विशेष महत्व होता है। इसी दिन रक्षाबंधन का प्रसिद्ध त्योहार भी मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि शुक्ल पूर्णिमा को श्रावणी उपक्रम भी किया जाता है।

उन्होंने बताया कि  ब्राह्मण समाज में यगोपवित धारण एक महत्वपूर्ण संस्कार है। यह जीवन के सोलह संस्कारों में से एक संस्कार है। उन्होंने बताया कि श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर यगोपवित संस्कार का भी विधान है। श्री महता ने यह भी बताया कि पूर्णिमा की तिथि धार्मिक दृष्टि के साथ साथ व्यवहारिक रूप से बहुत महत्व रखती है। श्रावणी पर्व पर की गई पूजा से भगवान शिव सीध्र ही प्रसन्न होते हैं। और अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं इस दिन शिव पूजा व जलाभिषेक का भी बहुत होता है।