सामाजिक सरोकार से सीधा जुड़ेगा विजय अस्पताल: डा:विनित

सामाजिक सरोकार से सीधा जुड़ेगा विजय अस्पताल: डा:विनित

-मीडिया के लोगों को परिजनों सहित कई सुविधाएं देने को ऐलान
बी.एल. वर्मा द्वारा :
नारनौल 20 जून 2019 :नारनौल में विभिन्न सुविधाओं से लैस विजय अस्पताल के संचालक एवं डायरेक्टर डा.विनित यादव ने कहा है कि अब उनका अस्तपताल सामाजिक सरोकारों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़कर विभिन्न सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर भाग लेगा। इसके लिए शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं व गणमान्य लोगों का भी सहयोग लिया जाएगा और क्षेत्र के गरीब तबके के लोगों को सस्ता व उचित इलाज उपलब्ध करवाया जाएगा।

डा. यादव ने बुधवार की रात को यहां के अपार होटल में एक पत्रकार सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि इसकी शुरूआत जुलाई माह से की जाएगी। अस्पताल की तरफ से जिला के विभिन्न गांवों व शहर के मोहल्लों में प्रतिदिन निशुल्क शिविर लगाए जाएंगे। जिसमें बीपी, शुगर, ईसीजी आदि की निशुल्क जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं जरूरतमंद लोगों को शिविर में निशुल्क दवाइयां भी उपलब्ध करवाई जाएगी।

डा. विनित यादव ने कहा कि शहर की कोई भी संस्था मेडिकल क्षेत्र में आमजन के लिए विजय अस्पताल की तरफ से जो भी सहयोग की अपेक्षा करेंगे वो उसके लिए हमेशा तत्पर रहेंगे।
डा.विनित यादव ने कहा कि मीडिया सरकार व प्रशासन ही नहीं बल्कि आम नागरिकों की भी आंख, नाक व कान का काम करती है। सरकारों ने भी मीडिया के लोगों को सुरक्षा व सुविधा देेने की शुरूआत की है।

इसलिए उनके अस्पताल में भी मीडिया के लोगों व उनके परिजनों को आज से निशुल्क ओपीडी सेवा शुरू उपलब्ध रहेगी और इतना ही नहीं यदि गंभीर बीमारी में अस्पताल में भर्ती की जरूरत भी पड़ी तो उनसे किसी प्रकार का भर्ती के लिए बैड चार्ज नहीं लिया जाएगा। साथ ही जो भी अन्य सुविधाएं होगी उनमें मीडिया के लोगों के मान-सम्मान के लिए उचित रियायत की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कोई भी चिकित्सक अपनी तरफ से किसी भी मरीज के लिए बुरा नहीं सोचता है, लेकिन कम्यूनिकेशन के अभाव व मरीज के परिजनों की नासमझी के चलते चिकित्सकों के सामने विकट परिस्थितियां बन जाती है। जिसका ज्वलंत उदाहरण नारनौल में पिछले पखवाड़े एक मरीज की मौत पर देखने को मिला है। डा.विनित यादव ने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण डाक्टर के सामने बहुत ही विकट परिस्थिति बन जाती है और चिकित्सकों का मनोबल टूटता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियां पैदा ना हो इसके लिए लोगों व सकारात्मक भावना जगानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि कारॅपोरेट अस्पतालों में चाहे कैसा भी मरीज हो सबसे पहले कांउटर पर ही भारी भरकम राशि जमा करने के बाद ही मरीज का इलाज शुरू किया जाता है, लेकिन छोटे शहरों में चिकित्सक मरीज जैसी स्थिति में आता है, उसी स्थिति में उसका इलाज शुरू कर देता है। फिर भी अनेक बार मरीजों के परिजनों का बर्ताव डाक्टरों के प्रति ठीक नहीं रहता है। इसलिए दोनों ही पक्षों की तरफ से सकारात्मक रवैया अपनाया जाना बहुत जरूरी है ताकि छोटे शहरों के डाक्टरों का हौसला बना रहे और वे अपनी सेवा अच्छी प्रकार से जनता को दें सके।

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