स्कूली बच्चों को सेनेटरी नैपकिन के उपयोग तथा पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में बताया 

 

स्कूली बच्चों को सेनेटरी नैपकिन के उपयोग तथा पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में बताया 
त्रिभुवन वर्मा द्वारा :
नारनौल 21अगस्त 2019 : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लोकेश गुप्ता के निर्देशानुसार आज राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल गढ़ी रुथल में सेनेटरी नैपकिन के उपयोग तथा पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में जागरूकता शिविर का आयोजन किया।
अधिवक्ता गिरिबाला यादव ने बताया कि सेनेटरी नैपकिन दो तरह के होते हैं जेल नैपकिन और पोर्टल नैपकिन। उन्होंने बताया कि अगर कॉटन नैपकिन को ज्यादा सेफ  मानते हैं तो यह भी गलत है। उन्होंने बताया कि सेनेटरी नैपकिन जब भी खरीदते हो यही दिमाग में रहता है कि यह लंबे समय तक चलने वाला आरामदायक दाग मुक्ति और सस्ता है लेकिन यह पर्यावरण के लिए भी उतना ही नुकसानदायक है। उन्होंने बताया कि सेनेटरी नैपकिन का उपयोग करने वाली बालिकाओं को मालूम नहीं है कि यह उत्पाद कुछ रासायनिक पदार्थों के कारण स्वास्थ्य के लिए खतरा है। इसके निस्तारण की जानकारी के अभाव में अधिकांश महिलाएं इसे कचरे के डिब्बे में फेंक देती हैं। उन्होंने कहा कि सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग करने के बाद गड्ढा खोदकर दबाया जाए या इसे जला दिया जाए। उन्होंने अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श के बीच अंतर पहचानने के बारे में भी छात्राओं को जानकारी दी।
इस मौके पर कानूनी स्वयंसेवक कुसुम शर्मा ने पौष्टिक आहार के बारे में बालिकाओं को जानकारी दी।

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