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स्मरण रखियेगा कोई भी यज्ञ बलि के बिना पूरा नहीं होता है, तुफ़ैल चतुर्वेदी

स्मरण रखियेगा कोई भी यज्ञ बलि के बिना पूरा नहीं होता है, तुफ़ैल चतुर्वेदी
फोटो साभार : hindi.webdunia.com
तुफ़ैल चतुर्वेदी :
आज तक मैं यही सोचता था कि हम तत्वदर्शी महर्षियों, ज्ञानी अन्वेषणकर्ताओं, चक्रवर्ती सम्राटों, प्रतापी सेनानियों के वंशज हैं। यही मान्यता पाकिस्तान के मुसलमानों के बारे में भी थी कि आख़िर वो भी कुछ पीढ़ी पहले हमारे ही थे। अब मोदी सरकार द्वारा कश्मीर से धारा 370 और 35A हटाने पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की अंतर्राष्ट्रीय उछल-कूद देख कर लग रहा है कि डार्विन का कथन सही है या कम से कम इमरान ख़ान और अन्य पाकिस्तानी नेताओं के सिलसिले में पक्का सही है कि इनके पूर्वज बंदर थे।
सामान्य बन्दर ऐसी उछल-कूद,ऐसी खों-खों जिससे कुछ भी प्राप्त न हो, नहीं करता। तो पाकिस्तानियों को क्या हो गया है ? ये क्यों क्लेश कर रहे हैं ? शीर्ष कोंग्रेसी नेतृत्व के अतिरिक्त सामान्य भारतीय बुद्धि को भी ऐसा करने का औचित्य समझ नहीं आता। शीर्ष कोंग्रेसी नेतृत्व की बात तो समझ में आती है कि ये चरस उसके नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने बोई थी मगर पाकिस्तानी मानस को समझना होगा।
अगस्त 1947 में भारतीय उपमहाद्वीप में कई प्रकार की राजनैतिक सत्तायें थीं। ब्रिटिश भारत, ब्रिटिश संधियों में बंधे रजवाड़े थे। कुछ बलूचिस्तान जैसे क्षेत्र भी थे जो अंग्रेज़ों के साथ संधियों में नहीं भी थे। 14-15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान, भारत अस्तित्व में आ गया। अधिकांश रजवाड़ों ने आगे-पीछे भारत या पाकिस्तान में विलय कर दिया। महाराज कश्मीर हरि सिंह जी को दोषी मानने वाले मित्रों को स्मरण रखना चाहिए कि सभी रजवाड़ों ने इन दोनों देशों में विलय नहीं किया था। सिक्किम ने बहुत बाद में भारत में विलय किया। तिब्बत को चीन हड़प गया। भूटान, नेपाल, अफ़ग़ानिस्तान आज तक स्वतंत्र हैं।
यह विलय जिस भाषा, जिन नियमों के तहत भारत में सभी रजवाड़ों का हुआ ठीक उसी भाषा में बिना कौमा, फ़ुल स्टॉप के बदलाव के महाराज हरि सिंह जी ने अपने राज्य कश्मीर का भारत में विलय कर दिया। जिस तरह सभी राजवंशों को अपने राज्य के बारे में अधिकार था, उसी तरह कश्मीर नरेश को भी था मगर जवाहर लाल नेहरू ने कश्मीर में धारा 370 और 35A लगा दी गयी। यह धारा ही थी जिसके आधार पर शेख़ अब्दुल्ला जैसे दुष्ट और पाकिस्तानी नेताओं में यह सोच पनपी कि कश्मीर का भारत में विलय अस्थाई है। जब महाराज कश्मीर ने अपने राज्य को भारतीय महासंघ में विलीन कर दिया तो नेहरू कौन थे जो पराई बछिया का दान करने का निर्णय कश्मीर घाटी के लोगों को दे रहे थे ?
प्रयाग का आनंद भवन उनके बाप का माल था जिसे चाहें दें मगर कश्मीर किस आधार पर उनका था जो उन्होंने ऐसी मूर्खता की ? ये तो कुछ ऐसा है कि नेहरू अपनी अंतरंग आत्मीय लेडी एडविना माउंटबेटन को गाँधी जी को ब्रह्मचर्य के प्रयोगों के लिए सौंप दें। क्या इसका अधिकार उन्हें था ? अतिरिक्त परम आत्मीयता के बाद भी अंततः वो माउंटबेटन की ही पत्नी तो थीं। अतः उन्हें गाँधी जी को नहीं सौंपा जा सकता था।
पाकिस्तानी यह सोचते हैं कि कश्मीर घाटी मुस्लिम बहुल थी अतः उसे पाकिस्तान को मिलना चाहिए था। इस तर्क को थोड़ा आगे बढ़ाते हैं। विभाजन के समय लाहौर महानगर और उसके आसपास का बड़ा क्षेत्र, सिंध का थरपारकर ज़िला और निकटवर्ती क्षेत्र, तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान की चट्टोग्राम कमिश्नरी 14 अगस्त 1947 में हिन्दू बहुल थी अतः इस तर्क से उसे भारत में मिलना चाहिये था। अब प्रश्न उठता है कि क्या लाहौर, थरपारकर, चट्टोग्राम के हिन्दुओं को अपने क्षेत्रों को भारतीय महासंघ में मिलाने का अधिकार था ? नहीं तो कश्मीर घाटी या जम्मू-कश्मीर-बाल्टिस्तान राज्य के मुसलमान निवासी अपने क्षेत्र को पाकिस्तान में किस तर्क के आधार पर विलय कर सकते हैं ?
सच यह है कि पिछले 70 वर्ष से पाकिस्तानी नेताओं ने अपने समाज को इस झूठ पर पाला है कि आज नहीं तो कल कश्मीर पाकिस्तान में मिल जायेगा। वो आये दिन कहते हैं कि कश्मीर उनकी शह-रग {मुख्य धमनी} है। इस ग़लत, झूठी बात को लगातार पुष्टि कश्मीर में नेहरू द्वारा लगायी धारा 370, 35A दे रही थी। पाकिस्तान की समस्या उसका क़ुरआन द्वारा प्रवर्तित, हदीसों और प्रारम्भिक इस्लामी चिंतकों द्वारा पुष्ट इस्लामी उम्मा का चिंतन है। अब विश्व में इस्लामी देशों का नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय इस्लामवाद, इस्लामी बिरादरी, काफ़िर वाजिबुल क़त्ल, क़िताल फ़ीसबीलिल्लाह जिहाद फ़ीसबीलिल्लाह में कम से कम घोषित रूप से विश्वास नहीं करता। इसके बावजूद कि इस्लामी संस्थानों का नेतृत्व जिन मुल्लाओं के हाथ में है वो अभी भी इसकी रट लगते हैं मगर जनसामान्य इसको बांगड़ूपन, कालकवलित समझते हैं।
इसके कारण कोढ़ में खाज यह हुई कि पाकिस्तान जिस मानसिकता से बना था, वही फ़ेल हुई जाती है। इसे विस्तार से समझने के लिए Creating of a New Madina by Venkat Dhulipala पढ़नी उपयुक्त होगी। जिसका संक्षेप यह है कि मुहम्मद जब मक्का से मदीना पलायन कर गया तो वहाँ सत्ता हाथ लग गयी और मदीना को केंद्र बना कर मक्का को जीता गया। बाद में यहीं से आसपास के क्षेत्रों पर भी इस्लाम ने क़ब्ज़ा किया। पाकिस्तान उसी सोच के अंतर्गत बनाया गया कि पाकिस्तान मदीना बनेगा और यहाँ से मक्का यानी शेष भारत को जीता जायेगा। इसी सपने का ही नाम तो ग़ज़वा ए हिन्द है।
कश्मीर घाटी से हिन्दुओं को मार भगाया गया तो अब्दुल्ला, मुफ़्ती जैसों की औलादें, उसके जैसी सोच वाले राजनेता, पाकिस्तानी जनता, सेना इसी हर्ष में डूब गई थी कि पाकिस्तान के बाद गज़वा ए हिंद का एक क़दम और पूरा हुआ। धारा 370 और 35A हटाने से सारी बिसात ही उलट गई। गज़वा ए हिंद की कुटम्मस हो गई। शब्दशः जिहादियों के हाथों से तोते उड़ गए। उनकी नाजाज़ संतानों पत्थरबाज़ों के पैर उखड़ गये। अब विश्व के इस क्षेत्र पर पर चर्चा का केंद्र बिंदु “आज़ादी का मतलब क्या लाइलाह इल्लिलाह” की जगह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर हो गया। इमरान ख़ान और अन्य पाकिस्तानी नेताओं की उछल-कूद इसी कारण हो रही है। अब उनकी समझ में नहीं आ रहा कि 70 साल से झूठ पर पाली गयी पाकिस्तानी जनता को कैसे बताएं कि भारत ने गिल्ली उड़ा दी और स्टम्प उखाड़ कर क़ब्ज़े में कर लिए, जो उसी के थे। विश्व के सभी प्रमुख, बड़े, छोटे देश मान-कह रहे हैं कि ये भारत का अधिकार है। उसके बांगड़ू नेतृत्व ने धारा 370 और 35A लगायी थी। अब बुद्धिमान नेतृत्व ने उठा ली। पाकिस्तान की हालत……तुम कौन मैं ख़ामख़ा…… वाली हो गयी है।
फिर भी स्मरण रखियेगा कोई भी यज्ञ बलि के बिना पूरा नहीं होता है। इसकी पूरी संभावना है कि हताश, खीजा हुआ पाकिस्तानी सैन्य और उसके तलुए चाटने वाला राजनैतिक नेतृत्व निकट भविष्य में भारत पर आक्रमण कर दे। उसके पास दबाव का अंतिम उपाय “दोनों परमाणु अस्त्र सम्पन्न देश हैं। विश्व को इसका धयान रखना चाहिए” के अतिरिक्त कुछ नहीं है अतः वो अपनी पर आ सकता है और संभव है कि आक्रमण कर दे। ये बलि होगी और उसके बाद यज्ञ की पूर्णाहुति होगी।
यही समय 1400 वर्ष की समस्या के स्थाई समाधान का होगा। पाकिस्तान के 4-5 टुकड़े करने होंगे। एक-एक करके अपने पूर्वजों की डार से बिछड़े पंछियों को वापस डार में मिलाने का यही समय होगा। रणचंडी के नर्तन का समय आ रहा है। महाकाली का खप्पर भरना होगा
तुफ़ैल चतुर्वेदी

tufailchaturvedi@gmail.com

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