स्वामी विवेकानंद की 157 वीं जयंती

सुरेंद्र व्यास  द्वारा
रेवाड़ी  १२ जनवरी,२०१९ :    12 जनवरी 2019 :स्वामी विवेकानंद की 157वीं जयंती के कार्यक्रम पूरे होने पर स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अपने कार्यालय में उनके चित्र पर पुष्पाजंली अर्पित करके उन्हे अपनी ओर से भावभीनी श्रद्घाजंली अर्पित करते हुए उनके जीवन चरित्र व कृतित्व का अध्ययन किया। कपिल यादव, अमन कुमार, प्रदीप कुमार, अजय कुमार ने भी स्वामी जी के प्रति अपने श्रद्घासुमन अर्पित किए।
विद्रोही ने कहा कि भूमि पर जन्मे स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया को भारत की सभ्यता व संस्कृति से अवगत करवाकर पाश्चात्य जगत पर भारत के दर्शन की गहरी छाप छोड़ी। पाश्चात्य सभ्यता में जीने वाले एक नास्तिक युवा नरेन्द्रनाथ के स्वामी रामकिशन परमहंस के सम्पर्क में आने से पूर्व किसी ने सोचा भी नही था कि पाश्चात्य सभ्यता की जीवन शैली को आधार मानने वाला यह नास्तिक युवक कभी पूरी दुनिया को धर्म व दर्शन का ज्ञान देकर सदियों तक प्रेरणा का स्त्रोत बनेगा। युवा नरेन्द्र नाथ का जीवन ही स्वामी रामकिशन परमहंस ने अपने ज्ञान व तपस्या से बदल दिया। नरेन्द्र नाथ से स्वामी विवेकानंद बने इस महान संयासी ने पूरे भारत व भारतीय दर्शन को दुनिया में एक नई ऊचांई पर पहुंचाया। विद्रोही ने कहा कि 2 सितम्बर 1893 को एक मात्र 30 वर्ष की आयु में शिकागो अमेरिका की धर्म संसद में किये गए उनके व्याख्यान ने पाश्चात्य जगत के मन में भारत के प्रति एक नया नजरिया पैदा कर दिया। स्वामी जी ने भारतीय सभ्यता, संस्कृति व दर्शन को पाश्चात्य जगत में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं स्वामी जी ने धर्म को समाजसेवा के साथ जोडक़र संयासियों के लिए जो एक नया रास्ता दिया, उस पर आज भी स्वामी रामकिशन परमहंस मिशन के संयासी दृढ़ता से चलते हुए एक नये समाज के निर्माण में जुटे हुए है व संयासी किस तरह समाज सेवा के माध्यम से सेवा करे, इसके लिए वे सभी के लिए प्रेरणा के स्त्रोत भी बने हुए है।
विद्रोही ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जन्मदिवस भारत में युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। मात्र 39 वर्ष की आयु में ही पूरी दुनिया को अपने विचार व कृतित्व से प्रेरणा देकर स्वामी विवेकानंद इस नश्वर संसार से चले गए, लेकिन उनके दिखाये रास्ते पर चलकर समतामूलक समाज की स्थापना करने के लिए युवाओं को प्रेरित करने व राष्टï्र और समाज निर्माण में योगदान करने के लिए ही पूरा देश स्वामी के जी जन्मदिवस को युवक दिवस के रूप में मनाता है। विद्रोही ने कहा कि देश का युवा स्वामी विवेकानंद के दिखाये गए रास्ते पर चलकर आत्म ज्ञान व समाज कल्याण दोनो में सामनज्य बैठाकर ही स्वामी जी के प्रति अपनी सच्ची श्रद्घांजली देने के पात्र बन सकते है।