हर युग में राजनीति ने कवियों और उनके काव्य को प्रभावित किया हैं: पुष्पा सिंह

नारनौल हुड्डा सेक्टर एक में मनुमुक्त भवन में हिन्दी-काव्य गोष्ठी को सम्बोधित करती वक्ता।
बी.एल. वर्मा द्वारा
नारनौल 8 अक्टूबर 2018
हर युग में राजनीति ने कवियों और उनके काव्य को प्रभावित किया है। हिन्दी-काव्य भी इससे अछूता नहीं रहा है। आदिकाल से लेकर वर्तमान काल तक हर कालखंड में राजनीतिक विचारधारा की अभिव्यक्ति हिन्दी-काव्य में हुई है। यह कहना है वरिष्ठ साहित्यकार तथा नारायणी साहित्य अकादमी, दिल्ली की अध्यक्ष डा. पुष्पा सिंह विसेन का। स्थानीय सेक्टर-1, पार्ट-2 स्थित अन्तरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केन्द्र मनुमुक्त भवन में हिन्दी-काव्य और राजनीतिक विचारधारा विषय पर रविवार को देर शाम आयोजित 33वीं साप्ताहिक संगोष्ठी में बतौर विशिष्ट वक्ता बोलते हुए उन्होंने कहा कि काव्य में राजनीतिक विचारों की अभिव्यक्ति परोक्ष रूप में होनी चाहिए। प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति से काव्य, काव्य न रहकर विचारधारा-विशेष का घोषणा-पत्र बनकर रह जाता है।
डा. पंकज गौड़ के कुशल संचालन में सम्पन्न हुई इस संगोष्ठी में मुख्यमंत्री के सुशासन-सहयोगी हिमांशु गुप्ता, पूर्व प्राचार्य डा. शिवताज सिंह और चीफ ट्रस्टी डा. रामनिवास मानव ने भी संभागी वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। हिमांशु गुप्ता ने कहा कि आज राजनीति मीडिया और साहित्य सहित हर संस्थान पर हावी होती जा रही है, जो देश और समाज के हित में नहीं है। डा. शिवताज सिंह ने स्पष्ट किया कि साहित्य का राजनीति से प्रभावित होना तो स्वाभाविक है, लेकिन उसका साहित्य पर हावी-प्रभावी होना उचित नहीं कहा जा सकता। डा. रामनिवास मानव ने एक दोहे के माध्यम से राजनीति के बढ़ते प्रभाव को कुछ इस प्रकार व्यक्त किया मुद्दा हो कश्मीर का या मस्जिद का काज। राजनीति हावी हुई हर मुदद्े पर आज। संगोष्ठी के अन्त में डा. पुष्पा सिंह विसेन को अंग वस्त्र, स्मृति-चिह्न और सम्मान-पत्र भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
इस विचारोत्तेजक संगोष्ठी में जिला बाल कल्याण अधिकारी विपिन शर्मा, नेहरू युवा केन्द्र के जिला युवा समन्वयक महेन्द्र नायक, पार्षद एवं निगरानी समित्ति के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह गौड़, लीड बैंक के जिला प्रबन्धक श्रवणदेव पाठक, महिला महाविद्याालय, भीटेड़ा (राजस्थान) के प्राचार्य डा. सुमेरसिंह यादव, पूर्व डाकपाल महेन्द्र वर्मा और गिरधारीलाल दायमा, हरियाणा शिक्षा बोर्ड के पूर्व उपसचिव दुलीचन्द शर्मा, पूर्व बैंक प्रबंधक विजयसिंह यादव, इतिहासकार रतनलाल सैनी, ट्रस्टी डा. कान्ता भारती, बनवारी लाल शर्मा, रामगोपाल अग्रवाल और कृष्णकुमार एडवोकेट, किशनलाल शर्मा, कृष्ण अवतार जांगिड़, नन्दलाल खामपुरा, उमेद सिंह यादव, परमानन्द दीवान, लक्ष्मी नारायण आर्य, हजारीलाल महावर, आजाद सिंह, रमेश मानव जय शेखावत, जयप्रकाश शर्मा, भूपसिंह भारती, नवरत्न वर्मा और मुनीलाल पचेरवाल सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
नारनौल हुड्डा सेक्टर एक में मनुमुक्त भवन में हिन्दी-काव्य गोष्ठी को सम्बोधित करती वक्ता।
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